दौसा जिले के मंडावर इलाके में गुरुवार को तीन मासूम बच्चों के साथ दो बहनों के ट्रेन के सामने खुदकुशी करने की दर्दनाक घटना में भी दौसा पुलिस का दिल नहीं पसीजा। इससे मृतकों के परिजन मुकदमा दर्ज करवाने के लिए 16 घंटों तक दौसा व करौली पुलिस के चक्कर लगाते रहे।
करौली जिले का क्षेत्राधिकार बताकर मंडावर थानाप्रभारी ने मुकदमा दर्ज करने में आनाकानी की। दौसा और करौली दोनों जिलों की पुलिस एक दूसरे का क्षेत्राधिकार बताकर आपस में उलझती रही। आखिरकार, टोडाभीम के स्थानीय विधायक घनश्याम मेहर ने डीजीपी मनोज भट्ट से फोन पर बातचीत कर शिकायत दी। तब डीजीपी के दखल के बाद करौली जिला पुलिस हरकत में आई और गुरुवार रात को मुकदमा दर्ज किया। तब शवों का पोस्टमार्टम हो कर अंतिम संस्कार हो पाया। मामले में लापरवाही बरतने से नाराज पुलिस मुख्यालय के निर्देशों के बाद शुक्रवार को दौसा जिले में महवा उपाधीक्षक राजेश मलिक और मंडावर थानाप्रभारी को हटा दिया गया।
गौरतलब है कि राजस्थान के करौली जिले के टोडाभीम की रहने वाली दो बहनों हेमा और बबीता की शादी अलवर के एक गांव में हुई थी। गुरूवार को इनके शव दौसा जिले के मंडावर में रेलवे पटरी पर मिले थे। इनके साथ इनके तीन बच्चे भी थे। तब मृतका महिलाओं के परिजन आरोपी ससुराल वालों के खिलाफ मामला दर्ज कराने के लिए दौसा के मंडावर थाने पहुंचे।
यहां थानाप्रभारी ने मुकदमा दर्ज करने में आनाकानी की। फिर एक जीरो एफआईआर दर्ज कर उसे तत्काल करौली जिले के टोडाभाीम थाने में भेज दिया। वहां भी पुलिस ने केस का क्षेत्राधिकार दौसा का बताकर रिपोर्ट नहीं ली।
इससे परेशान परिजनों ने शवों का अंतिम संस्कार नहीं किया। तब टोडाभीम विधायक घनश्याम ने समझाइश कर डीजीपी मनोज भट्ट से बातचीत की और डीजीपी की दखल पर पुलिस ने देर रात को मुकदमा दर्ज किया।