राजस्थान हाईकोर्ट ने सफाई कर्मचारियों की भर्ती के संबंध में कहा है कि एक परिवार से एक अभ्यर्थी को ही सेवा में लेने के आधार पर दूसरे सदस्य को भर्ती से वंचित नहीं किया जा सकता। न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश जितेन्द्र की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
याचिका में अधिवक्ता विमल चौधरी ने अदालत को बताया कि जयपुर नगर निगम में वर्ष 2012 में सफाई कर्मचारियों की भर्ती निकली थी। जिसकी चयन सूची 25 मई 2012 को जारी की गई। जिसमें याचिकाकर्ता का चयन यह कहते हुए नहीं किया गया कि एक परिवार में से एक को ही सफाईकर्मी के तौर पर नियुक्ति दी जा सकती है। याचिका में कहा गया कि अन्य किसी भी सेवा में ऐसी कोई बाध्यता नहीं है। ऐसे में याचिकाकर्ता को चयन से वंचित करना मनमाना है।
जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि परिवार में से एक के चयन के आधार पर याचिकाकर्ता को नियुक्ति देने से इंकार नहीं किया जा सकता।