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हिन्दू युवती से निकाह मामले में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर कोर्ट में सुनवाई

Mon, 27 Nov 2017 07:20 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर 
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अदालत। - फोटो : amar ujala
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धर्म परिवर्तन कर हिन्दू युवती पायल उर्फ आरिफा द्वारा निकाह करने के मामले मे राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर में दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई हुई। 
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जस्टिस गोपालकृष्ण व्यास व जस्टिस विरेन्द्र कुमार माथुर की खंडपीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता एमआर सिंघवी व उनके सहयोगी भावित शर्मा ने बहस पूरी की। सिंघवी ने कोर्ट में कहा कि जब तक कानून नहीं बनता तब तक के लिए हाईकोर्ट को अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए इस संबंध में गाइडलाइन जारी करनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में ही कहा है कि धर्म परिवर्तन मामलों में कानून बनाने का कार्य राज्य सरकार का है ना कि केन्द्र सरकार का।

उन्होंने बताया कि बुक एंड रजिस्ट्रेशन एक्ट 1867 सपठित संविधान के अनुच्छेद 77 के अर्न्तगत बने बिजनेस रूल्स के अर्न्तगत केन्द्र सरकार ने विस्तृत दिशा निर्देश,सर्कुलर,व फारमेट जारी किया है। जिसके अर्न्तगत नाम परिवर्तन,लिंग परिवर्तन,धर्म परिवर्तन आदि के संबंध में प्रक्रिया निर्धारित है। 
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जहां तक धर्म परिवर्तन का सवाल है, केन्द्र सरकार ने एक फार्म बना रखा है जिसके अन्तर्गत जिसमें युवती को अपना वर्तमान धर्म त्यागना होता है। उसके पश्चात ही वह अन्य धर्म ग्रहण कर सकता है। इसीलिए महज शपथ पत्र देने से कोई मुस्लिम बन जाए यह कानून गलत है।निकाह एवं शादी के लिए धर्म परिवर्तन करना कानून गलत है। 
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अब अतिरिक्त महाधिवक्ता एवं अप्रार्थीगण के अधिवक्ता की बहस

कोर्ट - फोटो : सांकेतिक चित्र
वरिष्ठ अधिवक्ता सिंघवी ने अपनी ओर से बहस पूरी कर ली अब इस मामले में सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवकुमार व्यास एवं अप्रार्थीगण के अधिवक्ता की ओर से बहस की जाएगी।
 
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