राशन के कपड़े की कालाबाजारी के करीब 30 साल पुराने मामले में अदालत ने आरोपी को एक साल के कारावास की सजा सुनाई है।
जयपुर जिले के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने गरीबों के लिए आवंटित किए जाने वाले कपडे को फर्जी दस्तावेजों से हासिल कर उनकी कालाबाजारी करने वाले व्यवसायी पवनकुमार अग्रवाल को एक साल की सजा सुनाई है। सजा के साथ ही अदालत ने अभियुक्त पर बीस हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।
मामले के अनुसार तत्कालीन खाद्य उपायुक्त जेपी विमल ने 30 दिसंबर 1988 को सीबीआई में रिपोर्ट दर्ज कराई दी। जिसमें कहा गया कि अभियुक्त ने राशन से मिलने वाले कपड़े की 208 गांठों की एनओसी मिल से लेकर उसकी कालाबाजारी कर दी। इस माल की कीमत करीब सवा सात लाख रुपए थी। रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए सीबीआई ने अदालत में आरोप पत्र पेश किया।