बांसवाड़ा में दो दिन पूर्व मामूली विवाद पर उपजा उपद्रव शुक्रवार दोपहर बाद तक रुक—रुक कर चलता रहा। पहले दो पक्षों में आपस में हुई पत्थरबाजी फिर आगजनी की घटना के कारण जिला प्रशासन ने बांसवाड़ा शहर में कर्फ्यू लगा दिया था। वहीं, शनिवार को भी बांसवाड़ा में इंटरनेट सेवाएं बंद हैं।
इसी उपद्रव के दौरान सुरक्षा में तैनात डूंगरपुर महिला थाना प्रभारी मनोज सांवरिया पर जब भीड़ को तितर—बितर करने का प्रयास कर रहे थे, तो किसी उपद्रवी ने उन पर तलवार से हमला कर दिया। इस हमले से थाना प्रभारी की तीन अंगुलियां कट गईं। साथ ही उनकी नाक व कान पर भी गंभीर चोंटे आई हैं। हालांकि शुक्रवार शाम से बांसवाड़ा में हालात नियंत्रण में है। वहीं अब पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहें है। दरअसल गुरुवार रात्रि को एक धार्मिक स्थल को लेकर उपजे विवाद के बाद पुलिस—प्रशासन की ओर से सख्ती नहीं दिखाई गई।
इसके कारण हालात नियंत्रण से बाहर हो गए थे। शुक्रवार को हुई आगजनी में उप्रदवियों ने 30 से ज्यादा घरों में आग लगा दी व कई वाहनों को फूंक दिया। इस उपद्रव में पांच पुलिसकर्मी घायल हुए है। हालात जब काफी बिगड़े तब पुलिस ने आंसू गैस का प्रयोग किया और लाठीचार्ज किया। साथ ही कर्फ्यू लगाकर इंटरनेट सेवाएं भी शुक्रवार दोपहर को बंद कर दी गई।
आईजी आनंद श्रीवास्तव ने बताया कि वतर्मान में शहर के चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात है। करीब तीन हजार से भी ज्यादा पुलिसकर्मियों को लगाया गया है। सुरक्षा के मद्देनजर सम्भाग के विभिन्न जिलों से पुलिस बल बांसवाड़ा में तैनात किया गया है। 70 से ज्यादा लोगों के खिलाफ नामजद मामला दर्ज कर लिया गया है और यह संख्या बढ़ रही है। हिंसा के आरोपी 35 असामजिक तत्वों को गिरफ्तार किया गया है।
उधर, बांसवाड़ा पहुंचे प्रभारी मंत्री धनसिंह रावत ने दोनों समुदाय में समझाइश करने लिए प्रबुद्ध लोगों को बुलाकर वार्ता प्रारम्भ कर दी है। दोनों पक्ष एक दूसरे की गिरफ्तारी के बाद से ही शांति बरतने की कह रहे हैं। दोपहर के बाद एक बार फिर से आईजी अपनी पूरी टीम के साथ शांति मार्च का निकालने की तैयारी कर रहे हैं। इस मार्च में अगर कुछ होता है तो संभव है पुलिस बड़ा एक्शन ले सकती है।