बाल कल्याण समिति कितनी मुस्तैदी से बच्चों की सार—संभाल करती है इसकी बानगी है डेढ़ माह से अजमेर के जेएलएन अस्पताल में भर्ती लावारिस विमंदित बालक। बच्चा महिला सुरक्षा गार्ड और नर्सिंग स्टाफ की देखरेख में है। कई बार अस्पताल अधीक्षक समिति को पत्र लिख चुके हैं लेकिन समिति ने अब तक बच्चे की सुध नहीं ली है।
बाल कल्याण समिति यूं तो लावारिस मिलने वाले बच्चों के लिए बड़े—बड़े दावे करती हैं लेकिन समिति के दावों की पोल जेएलएन अस्पताल में भर्ती विमंदित बालक खोल रहा है। अस्पताल के शिशुरोग विभाग प्रभारी डाॅ. बीएस कर्नावट ने बताया कि डेढ़ माह में कई बार स्थानीय और प्रदेश स्तरीय बाल कल्याण समिति को अस्पताल अधीक्षक के जरिए पत्र लिखकर बच्चे की सुध लेने की मांग की गई, लेकिन समिति ने अब तक अस्पताल आने तक की जहमत नहीं उठाई है। उन्होंने कहा कि बच्चे के खाने-पीने सहित अन्य जरूरतमंद सामग्री का वहन नर्सिंग स्टाफ और महिला सुरक्षा गार्ड कर रहे हैं। डाॅ. कर्नावट ने कहा कि बच्चा डेढ माह पूर्व गांधी भवन चौराहे पर लावारिस हालत में मिला था। अब बच्चे को नियमित उपचार मिलने से उसकी हालत में सुधार है। उन्होंने मीडिया के जरिए जिला प्रशासन से बच्चे की देखरेख के लिए समिति को पाबंद करने की मांग की है।