बहुचर्चित कांकाणी हिरण शिकार में फंसे बॉलीवुड स्टार सलमान खान और अन्य कलाकारों के विरुद्ध चल रहे मामले में सलमान खान की ओर से अंतिम बहस पूरी हो गई है।
आज मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट जोधपुर ग्रामीण देवकुमार खत्री के समक्ष विगत अक्टूबर से चल रही अंतिम बहस करीब तीस सुनवाई के बाद आखिरकार पूरी हुई। अंतिम बहस की अंतिम दलीलें देते हुए सलमान खान के वकील हस्तीमल सारस्वत ने तर्क दिया की पूरे अनुसंधान में सलमान से कोई भी ऐसी वस्तु बरामद नहीं हुई, जो उन्हें अपराध से जोड़ती हो। साथ ही, अभियोजन द्वारा बताए गए घटनास्थल पर जिप्सी के टायरों के निशान भी नहीं मिले और ना ही ऐसी कोई रिपोर्ट पत्रावली पर आई है, जो हिरणों की मृत्यु गनशॉट से होने की पुष्टि करे।
सारस्वत ने अभियोजन गवाह पूनम चंद, शेराराम व मांगीलाल के विरोधाभासी बयानों को अविश्वसनीय बताया। साथ ही, मामले के अनुसंधान अधिकारी ललित बोड़ा व अन्य गवाहों की जिरह के आधार पर अभियोजन द्वारा झूठे साक्ष्य के सृजन करने की दलील भी दी। सारस्वत ने अभियोजन की कहानी पर संदेह उत्पन्न किया और तत्कालीन कलक्टर, पुलिस व वनविभाग द्वारा सलमान को झूठे मुकदमें में फंसाने की बात भी कही।
मामले में दोषमुक्त करने का निवेदन
सलमान खान
वकील हस्तीमल सारस्वत ने सलमान खान को मामले से दोषमुक्त करने का निवेदन करते हुए अंतिम बहस पूरी की। अब इस मामले में अन्य आरोपियों की ओर से बहस 14 फरवरी से शुरू होगी। गौरतलब है कि पूरा मामला एक अक्टूबर 1998 का है, जब सलमान समेत अन्य फिल्म कलाकारों पर जोधपुर-पाली रोड पर कांकाणी गांव में हिरण शिकार का आरोप लगा था। इसमें अभिनेता सैफ अली खान, अभिनेत्री नीलम, तब्बू और सोनाली बेंद्रे को भी आरोपी बनाया गया है। इन पर सलमान को शिकार करने के लिए उकसाने का आरोप है।
सलमान पर लगे हैं ये आरोप
अभिनेता सलमान पर कुल चार मामले दर्ज किए गए थे। जिसमें सलमान द्वारा विभिन्न इलाकों में शिकार करने के आरोप लगाए गए थे। सलमान पर जोधपुर के ओसियां तहसील के मथानियां थाना क्षेत्र के दो जगह शिकार करने के आरोप लगे थे। जिसमें पहला भवाद गांव में दो चिंकारा के शिकार करने का आरोप था।
दूसरे मामले में मथानियां थाना क्षेत्र के घोड़ा फार्म हाउस में सलमान पर एक चिंकारा का शिकार करने का आरोप था। दोनों मामले सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं।
वहीं ऑर्म्स एक्ट मामले मे सलमान को सीजेएम ग्रामीण कोर्ट ने संदेह के आधार पर बरी कर दिया था, लेकिन सरकार ने इस मामले में भी अपील की, जो जिला एवं सत्र न्यायालय ग्रामीण रविन्द्रकुमार जोशी की कोर्ट में विचाराधीन है।