फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बसंत पंचमी: अमीर खुसरो की परम्परा आज भी जिंदा है इस विश्व विख्यात दरगाह में

Tue, 23 Jan 2018 05:56 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
विज्ञापन
डेमो इमेज
विज्ञापन
बसंत पंचमी के मौके पर देश की विश्व प्रसिद्ध दरगाह में एक अलग नजारा देखने को मिला जहां दरगाह में बसंत पेश किया गया।
विज्ञापन


अजमेर स्थित सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में मंगलवार को बसंत पंचमी के मौके पर शाही कव्वालों के बसंत गीतों के बीच ख्वाजा साहब की मजार पर गुलदस्ते पेश किए गए।ख्वाजा साहब की दरगाह में इस्लामी कैलेंडर के अनुसार पांच तारीख को बसंत उत्सव मनाए जाने की परम्परा वर्षों से चली आ रही है।

इसके तहत शाही कव्वालों ने अमीर खुसरो द्वारा बसंत पर लिखे गए गीतों को गाते हुए मजार शरीफ पर फूलों के गुलदस्ते पेश किए। इससे पहले बसंत का जुलूस निकाला गया जो निजाम गेट से शुरू हुआ। बसंत उत्सव के चलते पूरी दरगाह को फूलों से सजाया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

सांप्रदायिक सौहार्द का बेजोड़ नमूना

फाइल फोटो
दरगाह के जानकारों की मानें तो सबसे पहले बसंत अमीर खुसरो ने हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह पर पेश किया था। इसके बाद से यह परम्परा चलन में आई हालांकि ख्वाजा साहब के यहां बसंत कब से शुरू हुआ इसका कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

गौरतलब है कि अजमेर कि विश्व प्रसिद्ध दरगाह में लगभग सालभर भी सभी समुदाय के जायरीनों का आना जाना लगा र​हता है और इसलिए इस दरगाह को सांप्रदायिक सौहार्द का बेजोड़ नमूना भी कहा जाता है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें