राजस्थान हाईकोर्ट ने स्वच्छ भारत मिशन योजना में संविदा पर लगे ब्लॉक समन्वयकों को हटाकर दूसरे संविदाकर्मियों को लगाने पर रोक लगा दी है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि इस पद के लिए नियमित चयनित अभ्यर्थी मिलता है तो सरकार याचिकाकर्ताओं को सेवा से हटा सकती है। इसके साथ ही अदालत ने प्रमुख ग्रामीण विकास सचिव और उदयपुर कलक्टर सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
न्यायाधीश वीएस सिराधना की एकलपीठ ने यह आदेश रमेशचन्द्र नायक व अन्य की ओर से दायर याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता आरके गौतम ने बताया कि याचिकाकर्ता करीब आठ साल से ब्लॉक समन्वयक के पदों पर संविदा के तौर पर काम कर रहे हैं। राज्य सरकार उन्हें बिना कारण बताए हटाकर नए लोगों को संविदा पर लगाना चाहती है। जबकि उच्चतम न्यायालय तय कर चुका है कि संविदा कार्मिक को हटाकर दूसरे संविदाकर्मी को नहीं लगाया जा सकता। यदि संबंधित पद के लिए नियमित चयनित अभ्यर्थी मिले या संबंधित पद का काम ही समाप्त हो जाने की स्थिति में ही संविदाकर्मियों को हटाया जा सकता है। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने याचिकाकर्ता संविदाकर्मियों को हटाकर दूसरे संविदाकर्मी लगाने पर रोक लगाते हुए संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।