फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'बालिका वधू' को ले गए ससुराल वाले, सहपाठी बच्चों की सूझबूझ से हुई वापसी

Wed, 31 May 2017 06:56 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर 
विज्ञापन
demo pic - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
यह कहानी है जयपुर की झालाना बस्ती में रहने वाली एक ऐसी 14 वर्षीया बालिका वधू की। जिसके घर वालों ने महज सात-आठ साल की उम्र में उसकी शादी उससे दुगने उम्र वाले लड़के से कर दी।
विज्ञापन


जब बालिका वधू 14 साल की हुई और हाल ही में दसवीं की परीक्षा दी। तभी से ससुराल वाले उसे साथ ले जाने पर आमादा हो गए। दबाव बनाने लगे और आखिरकार रविवार को बालिका वधू को अपने साथ लेकर चले गए। जब यह खबर बालिका वधू के सहपाठियों को पता चली तब वे बैचेन हो गए और परिजनों के सहयोग नहीं करने पर उन्होंने गुरुजनों की मदद ली और अपनी सूझबूझ व जिद से दो दिन में ही साथी सहपाठी को पुलिस प्रशासन की मदद से सोमवार को ससुराल से मुक्त करवा लिया।

मामले में जहां एक ओर मालवीय नगर थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। वहीं, दूसरी तरफ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने प्रसंज्ञान लेकर मौका निरीक्षण कर जांच रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए है।
विज्ञापन


राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव तथा जिला एवं सशन न्यायाधीश एसके जैन ने इस संबंध में राजस्थान उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति की पूर्णकालिक सचिव, अनु चौधरी (आरजेएस.) को निर्देश दिए हैं कि वे राजस्थान उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति की रिटेनर अधिवक्ता शालिन शेरोन के सहयोग से मौका निरीक्षण एवं जांच कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर एक जून तक उन्हें प्रस्तुत करे। 


 
विज्ञापन

सहपाठी एेसे पहुंचे बालिका वधू के ससुराल और सुनी आपबीती

demo pic - फोटो : अमर उजाला
बालिका वधू ने बताया कि  मासूम बच्ची ससुराल नहीं बल्कि स्कूल जाकर पढ़ना लिखना चाहती थी। अपने साथी सहपाठियों के साथ खेलना चाहती थी। बालिका वधू ने अपने परिजनों ने विनती की। रोई भी बहुत की उसे ससुराल नहीं भेजें। लेकिन ससुराल वालों की​ जिद के आगे उस मासूम बच्ची की नहीं चली और रविवार को उसे जबरन अपने साथ ससुराल ले गए।

बालिका वधू के सा​थियों ने बताया कि उन्होंने अपनी सहेली की मदद कर उसे छुड़ाने की ठान ली और प्रताप नगर इलाके में तलाश करते भटकते हुए बालिका वधू सहेली के ससुराल जा पहुंचे। ​उसकी आपबीती सुनी और पीड़ा देखकर अपने टीचर्स को इसकी जानकारी दी।

उनके सहयोग से पुलिस थाने, महिला आयोग और जिला कलेक्टर के आॅफिस पहुंचकर शिकायत देकर अपनी सहपाठी छात्रा को छुडवाने की गुहार लगाई। तब प्रशासन ने मदद कर बच्ची को मुक्त करवा लिया।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें