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तो इसलिए दी गई जूतों की गठरी उठाने और दस लाख के जुर्माने की सजा...

Mon, 09 Oct 2017 11:32 AM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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फाइल फोटो।
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सामाजिक कुरीतियों का बोझ कम होने के बजाए बढ़ता ही जा रहा है। इन कुरीतियों का एक और परिवार शिकार हो गया है।
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राजस्थान के जैसलमेर जिले में एक ऐसा ही मामला सामने आया है। जहां एक परिवार को समाज से सिर्फ इसलिए बहिष्कृत कर दिया गया, क्योंकि उसने मृत्युभोज का आयोजन नहीं किया था। यहीं नहीं समाज के पंच पटेलों ने सजा वापस लेने के बदले में परिवार पर दस लाख का अर्थदण्ड और जूतों की गठरी को सिर पर रखने की सजा का भी ऐलान किया है।

दरअसल जैसलमेर के बोनाड़ा निवासी नखतराम ने पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई है कि उनके समुदाय के पंचों ने फरमान सुनाया है कि अपने बहनोई के देहांत के बाद उसने व उसके भांजों ने मृत्युभोज नहीं आयोजित किया, इस कारण उसे समाज से बहिष्कृत किया जाता है।
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पुलिस कर रही है जांंच

फाइल फोटो।
नखतराम ने पुलिस को बताया कि उसने पंचों के सामने अपनी बात रखी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। पुलिस को दर्ज प्राथमिकी के अनुसार नखतराम के साथ विभिन्न गांवों के कई पंचों ने उसके साथ मारपीट भी की है।

साथ ही बहिष्कार समाप्त करने के लिए अर्थदण्ड व जूतों की सजा मानने के लिए भी बाध्य किया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच प्रारंभ कर दी है।
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