आत्मकल्याण के बोध का हवाला देते हुए एक युवा दंपत्ति सांसरिक मोहमाया को त्यागकर संत बनने जा रहा है।
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ की रहने वाली अनामिका और एमपी के नीमच निवासी उनके पति सुमित ने अपनी करोड़ों की प्रोपर्टी के साथ तीन वर्षीय अपनी मासूम बेटी इभ्या का भी त्याग करने का निर्णय ले लिया है।
ये दंपत्ति आगामी 23 सितम्बर को गुजरात के सूरत में जैन भगवती शिक्षा लेगा। बच्ची के भी त्याग के सवाल पर सुमित और अनामिका का कहना है कि यह बच्ची तो पुण्यशाली है, क्योंकि इसके जन्म के बाद ही उन्हें आत्मकल्याण का बोध हुआ है।