जयपुर के पास आमेर के पांच हजार साल पुराने मंदिर में सोमवार को ढाई सौ साल पुरानी परम्परा निभाई गई। आमेर के हजारों साल पुराने मंदिर अंबिकेश्वर महादेव में एक विशेष आयोजन हुआ, जिसमें यहां ढाई सदी पुरानी तमाशा शैली परम्परा का निर्वहन किया गया।
यहां अंबिकेश्वर महादेव मंदिर समिति की तरफ से आयोजित गोपीचंद भृतहरी तमाशा प्रांगण में खेला गया। इस मंदिर के बारे में बहुत अद्भुत बातें भी हैं। अंबिकेश्वर महादेव मंदिर के बारे में एक खास बात बहुत प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि ये मंदिर करीब पांच हजार साल पुराना है। माना जाता है कि आमेर का नाम इसी मंदिर के नाम पर ही रखा गया है। यहां मौजूद शिवलिंग प्राकृतिक है, जो कि धरती से 22 फीट गहराई में पाया गया था।
ऐसी मान्यता है कि राजा काकिल देव के पास एक गाय थी, जो एक खास जगह पर ही दूध दिया करती थी। राजा इस बात से प्रभावित थे। उन्होंने उस जगह की खुदाई करवाना तय किया। खुदाई के दौरान एक शिवलिंग पाया गया, तब राजा ने उस जगह पर मंदिर निर्माण का आदेश दिया। तब से लेकर अब तक उस जगह पर वह शिवलिंग मौजूद है।