Malaika Arora, Geeta Kapoor and Terence Lewis
- फोटो : Amar Ujala, Mumbai
लोगों में सांस्कृतिक नृत्य के लिए आत्मविश्वास जगाने के लिए क्या किया जा सकता है?
इसके लिए लोगों का नजरिया बदलना बहुत जरूरी है। भारत में डांस के लिए अकादमी और स्कूल तो हर राज्य में बहुत हैं, लेकिन डांस को कोई गंभीरता से नहीं लेता है। सब इसको सिर्फ पैसे बनाने का जरिया समझते हैं। सांस्कृतिक नृत्य के लिए लोगों का नजरिया बदलने वाले सिर्फ गुरु हो सकते हैं जो उन्हें सही और सटीक शिक्षा दे सकते हैं।
कहीं ऐसा तो नहीं है कि लोगों के दिमाग में यह चीज फिट हो गई कि डांसर का कोई भविष्य नहीं है?
ऐसे तो हर समय, हर साल, हर पीढ़ी में एक कोई ऐसा आएगा, जो कहेगा कि हमारे माता-पिता इन सब चीजों में भरोसा नहीं करते हैं। लेकिन मैं आपसे दावे के साथ कह सकती हूं कि बड़े शहरों की अपेक्षा छोटे शहरों से या गांव से लोग ज्यादा आते हैं। वे किसी भी बड़े स्कूल में पढ़ रहे या डांस सीख रहे बच्चे से ज्यादा अच्छा डांस करते हैं। डांस अब छोटे-छोटे शहरों छोटे-छोटे तबकों में पहुंच चुका है। अब डांस में भी करियर है। हम सबका घर उसी से चलता है।
Malaika Arora, Geeta Kapoor and Terence Lewis
- फोटो : Amar Ujala, Mumbai
रियलिटी शोज को लेकर इन दिनों ये बात खूब होती है कि सब कुछ फिक्स है। इसमें कितनी सच्चाई है?
हर शो में लोगों को लगता है कि शो फिक्स हो चुका है। शो में पक्षपात किया जा रहा है, क्योंकि लोगों का काम है कहना। अगर आप कोई भी चीज बेईमानी से करते हैं, ईमानदारी नहीं दिखाते हैं, तो लोगों को दिखता है। अगर कोई प्रतियोगी नहीं जीत रहा है, तो ना जीते। जो अच्छा कर रहा है उसे जीतने का मौका मिलना ही चाहिए। इसी बात पर मेरा हमेशा लोगों से झगड़ा होता है। मैं हमेशा कहती हूं कि सब चीजें प्राकृतिक होने दीजिए। कोई भी चीज नकली मत करो।
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