पहले चरण की 71 सीटों पर होने वाले चुनाव में इस बार राजद के सामने बड़ी चुनौती है। 2015 में हुए चुनाव में इन 71 सीटों में सबसे ज्यादा सीटें राजद ने ही जीती थीं। राजद को तब 27 सीटों पर जीत मिली थी। जदयू 17 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर रहा था।
भाजपा को 13 सीटें मिली थीं, इस बार भाजपा-जदयू के साथ होने से राजद के सामने चुनौती
भाजपा ने 13 सीटें जीतकर तीसरे नंबर पर कब्जा किया और नौ सीटों के साथ कांग्रेस चौथे स्थान पर थी। हालांकि उस चुनाव जदयू-राजद और कांग्रेस एक साथ थे और भाजपा, लोजपा, हम और रालोसपा एक साथ। तब महागठबंधन भारी पड़ा था। इस बार समीकरण उलट गए हैं। भाजपा-जदयू अब एक साथ हैं और हम भी राजग गठबंधन का हिस्सा बन चुका है। जाहिर है बदले समीकरण का असर नतीजों को प्रभावित कर सकता है।
पिछली बार 14 सीटों पर जदयू से टक्कर में भारी पड़ी थी भाजपा
2015 में पहले चरण की 71 सीटों में 14 पर जदयू-भाजपा की सीधी टक्कर थी। इन 14 सीटों पर तब भाजपा भारी पड़ी थी। भाजपा ने नौ सीटें जीतीं और जदयू पांच सीटों पर जीत पाई। लखीसराय, बाढ़, भभुआ, चैनपुर, गोह, गुरुआ, हिसुआ, वरसलीगंज और झाझा में भाजपा ने जदयू को पटखनी दी थी, वहीं अमरपुर, बेलहर, राजपुर, दिनारा और नबीनगर में जदयू का तीर निशाने पर जा बैठा था।
हम से भी जदयू को मिली थी टक्कर
पिछले चुनाव में जीतन राम मांझी की पार्टी हम एनडीए गठबंधन का हिस्सा थी। पहले चरण में जिन 71 सीटों पर चुनाव होने हैं उनमें तब पांच सीटों पर हम और जदयू की आमने-सामने की टक्कर हुई थी जिनमें जदयू चार सीटें शेखपुरा, घोसी, शेरघाटी और टेकारी जीत गई। हम महज एक सीट इमामगंज जीत पाई, जहां से खुद अध्यक्ष जीतन राम मांझी मैदान में थे।
लोजपा से भी जदयू को मिली थी टक्कर
पिछली बार लोजपा और जदयू के बीच जमालपुर और रफीगंज में आमने-सामने की टक्कर थी। दोनों सीटों पर जदयू ने जीत दर्ज की थी। पहले चरण का ये चुनाव दिलचस्प होगा। इस बार समीकरण पूरी तरह से बदल चुके हैं। जातिगत वोट को प्रभावित करने की क्षमता रखने वाले कुछ पुराने खिलाड़ी नए रूप में मैदान में हैं।