जीका वायरस संक्रमित एडीज प्रजाति के मच्छर के काटने से फैलता है। ये संक्रमित मच्छर दिन और रात कभी भी किसी को भी अपनी चपेट में ले सकते हैं। एडीज मच्छर को एई के नाम से भी जाना जाता है, इजिप्टी और एई। एडिज एल्बोपिक्टस डेंगू, चिकनगुनिया और येलो फीवर जैसी बीमारियों का कारण भी बनता है।
सीडीसी के अनुसार, संक्रमण के पहले वीक में जीका वायरस ब्लड में पाया जा सकता है और मच्छर के काटने से एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे मच्छर में भी सकता है। इसी तरह से एक संक्रमित मच्छर दूसरे मच्छरों और काटने पर मानवों को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए सभी सावधानियां बरतें।
पहली बार युगांडा के बंदरों में मिला था
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, जीका वायरस एडीज मच्छरों के काटने से फैलता है जो कि दिन व शाम के वक्त सक्रिय होते हैं। यह पहली बार 1947 में युगांडा के बंदरों में पाया गया था। इसके बाद 1952 में युगांडा और तंजानिया में मानवों में पाया गया था। जीका वायरस की मौजूदगी एशिया, अफ्रीका, अमेरिका पैसिफिक आइलैंड में पाई जा चुकी है।
भारत में 2017 में मिला था पहला केस
2015 में जीका वायरस ब्राजील में बड़े पैमाने पर फैल गया था। इससे 1600 से अधिक बच्चे विकृति के साथ पैदा हुए थे। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने पहली बार नवंबर 2018 में जीका वायरस को अलग करने में सफलता पाई थी। भारत में पहली बार जनवरी 2017 में जीका वायरस का केस मिला था। इसके बाद जुलाई 2017 में तमिलनाडु में भी केस मिले थे।