विवादित धर्म प्रचारक जाकिर नाइक के संगठन इस्लामिक रिसर्च फाउंडेरशन (आईआरएफ) ने ट्रिब्यूनल के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। ट्रिब्यूनल ने आईआरएफ पर प्रतिबंध के फैसले को कायम रखा था। केंद्र सरकार ने नवंबर 2016 में संगठन पर अवैध गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया था।
यह याचिका कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति गीता मित्तल के समक्ष सुनवाई के लिए आई थी लेकिन उन्होंने इस मामले को सुनने से इनकार करते हुए किसी अन्य पीठ के समक्ष भेज दिया। अब याचिका पर 27 जुलाई को किसी अन्य पीठ के समक्ष सुनवाई होगी।
विशेष ट्रिब्यूनल ने 11 मई को सरकार के निर्णय को कायम रखते हुए कहा कि देश की सुरक्षा को खतरे के अलावा ऐसे तमाम कारण हैं जिनके मद्देनजर आईआरएफ को अवैध संगठन घोषित किया जाए। आईआरएफ ने ट्रिब्यूनल के 11 मई के फैसले को रद्द करने की मांग की है।
उसका कहना है कि नाइक व उनकी सहायक आरशी कुरैशी के कृत्यों के लिए संगठन को जिम्मेदार ठहराने का फैसला करने मेें त्रुटि की है। नाइक संगठन के अध्यक्ष हैं लेकिन उनके व्यक्तिगत कामों की जिम्मेदारी संगठन पर नहीं डाली जा सकती।
संगठन का कहना है कि जिन लोगों का नाम एफआईआर में है उन्हें संगठन से जोड़ कर नहीं देखा जा सकता क्योंकि ऐसा करना इसके धर्मार्थ व शैक्षिक कार्यक्रमों को प्रभावित करेगा।