इस्लामिक प्रचारक जाकिर नाईक की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नाईक की 100 करोड़ की बेनामी संपत्ति के मामले में उनका एक करीबी सहयोगी सीआरपीसी के सेक्शन 164 के अंतर्गत इकबालिया बयान दे सकता है। बताते चलें कि एनआईए ने पिछले साल जाकिर नाइक के संगठन इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन के खिलाफ धन शोधन अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के सूत्रों के अनुसार, एक अन्य मुख्य सहयोगी भी नाईक के खिलाफ बयान देने के लिए सहमत हो गया है। लेकिन, वह फ्रैक्चर से जूझ रहा है, जिससे कानूनी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। एजेंसी का कहना है कि उनके पास पहले से ही नाईक के खिलाफ पूख्ता सबूत हैं। नाईक के गैरजमानती वारंट के लिए एनआईए जल्द ही कोर्ट भी जा सकती है।
बताते चलें कि इससे पहले एनबीडब्लू ने नाईक को सीआरपीसी के सेक्शन 82 के अंतर्गत 'घोषित अपराधी' के लिए एप्लिकेशन दिया है।
इससे पहले पिछले साल 17 नवंबर को सरकार की ओर से एक आदेश जारी करते हुए इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन को गैर कानूनी संगठन घोषित कर दिया गया था। आरोप था कि इस संगठन आपराधिक गतिविधियों के संचालन के लिए दूसरी कंपनियां बना रखी है।