जायरा वसीम (फाइल फोटो)
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फिल्मी दुनिया में काम करना इस्लाम विरुद्ध नहीं : जमीयत-ए-इस्लामी हिंद
जमीयत-ए-इस्लामी हिंद ने कहा है कि कोई भी महिला या पुरुष फिल्मी दुनिया में काम कर सकता है। यह किसी भी तरह इस्लाम विरुद्ध नहीं है। लेकिन इस बात का ख्याल अवश्य रखा जाना चाहिए कि फिल्मी दुनिया में काम करते समय वह अपने चरित्र को बनाये रखे। संगठन के मुताबिक ऐसा करते हुए भी कोई व्यक्ति अपने ‘ईमान’ को बरकरार रख सकता है। लेकिन उसे ध्यान रखना चाहिए कि उसके काम से समाज की भलाई हो और उस फिल्म से समाज की बेहतरी का संदेश जाए।
जामियत-ए-इस्लामी हिंद के सचिव मलिक मोहतसिम खान ने जायरा वसीम के फिल्मी दुनिया छोड़ने पर उठे विवाद पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह किसी व्यक्ति का निजी फैसला है। वह अपना जीवन कैसे व्यतीत करना चाहता है, क्या खाना और क्या पहनना चाहता है, इसकी उसे पूरी आजादी है और ऐसा ही होना चाहिए। लेकिन जहां तक फिल्मी दुनिया में काम करने का सवाल है, फिल्मी दुनिया में काम करना किसी भी तरह इस्लाम के विरुद्ध नहीं है। इस बात का ख्याल अवश्य रखा जाना चाहिए कि ऐसा करते समय उसका चरित्र अच्छा बना रहे।
करियर का फैसला धर्म को आधार बनाकर न करें : प्रियंका चतुर्वेदी
कांग्रेस छोड़कर शिवसेना में शामिल हुईं प्रियंका चतुर्वेदी ने जायरा को लेकर ट्विटर पर कहा, 'अगर यह आपको आकर्षित कर रहा है तो आप अपनी आस्था का पालन कर सकते हैं। मगर अपने करियर का फैसला धर्म को आधार बनाकर न करें। यह आपके धर्म को असहिष्णु बताता है जबकि असल में ऐसा नहीं है। यह उनके धर्म (जायरा) के लिए भी एक बड़ा प्रतिगामी कदम है और इस गलत धारणा को और पुष्ट करता है कि इस्लाम में सहिष्णुता का स्थान नहीं है।'
दबाव में लिया फैसला : शाहनवाज हुसैन
भाजपा के प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने एक चैनल से बातचीत में कहा, 'धर्म के आधार पर अभिनय छोड़ने का फैसला दबाव में लिया हुआ लग रहा है। वह लगातार कट्टरपंथी समूहों के निशाने पर भी थीं।' जायरा के फिल्मों में काम करने को लेकर कई बार कट्टरपंथियों ने उनपर जुबानी हमले किए थे।