रेड्डी ने कहा कि एक राष्ट्र-एक चुनाव की अवधारणा के कई सकारात्मक पहलू हैं, सबसे बड़ी बात यह है कि इससे हजारों करोड़ रुपये की बचत होगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह अवधारणा भारत के लिए नई नहीं है। उन्होंने कहा कि 1951-52, 1957, 1962 और 1967 में एक साथ आम और राज्य चुनाव पहले ही हो चुके हैं।
युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) महासचिव वी विजयसाई रेड्डी ने शनिवार को 'एक राष्ट्र-एक चुनाव' प्रस्ताव की वकालत करते हुए कहा कि इसमें कई सकारात्मकताएं हैं और यह हजारों करोड़ रुपये बचाने में मदद कर सकता है। रेड्डी आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ दल से राज्यसभा सांसद भी हैं। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा राज्य विधानसभाओं और लोकसभा के लिए एक साथ चुनाव कराने की संभावना का अध्ययन करने के लिए पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के नेतृत्व में एक समिति गठित करने के मद्देनजर अपने विचार व्यक्त किए।
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रेड्डी ने एक्स पर पोस्ट किया, एक राष्ट्र-एक चुनाव की अवधारणा के कई सकारात्मक पहलू हैं, सबसे बड़ी बात यह है कि इससे हजारों करोड़ रुपये की बचत होगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह अवधारणा भारत के लिए नई नहीं है। उन्होंने कहा कि 1951-52, 1957, 1962 और 1967 में एक साथ आम और राज्य चुनाव पहले ही हो चुके हैं। रेड्डी ने अपने पोस्ट में कहा, भारत में 1951-52, 1957, 1962 और 1967 में एक साथ आम और राज्य चुनाव हुए थे। आंध्र प्रदेश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होने से इसका हम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
कांग्रेस एमएलसी ने भाजपा पर साधा निशाना
वहीं, कर्नाटक कांग्रेस एमएलसी बीके हरिप्रसाद ने कहा कि वे (भाजपा) राष्ट्रपति के पद का अपमान कर रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एनडीए विशेषकर भाजपा इस स्तर तक गिर गई है और 'एक राष्ट्र-एक चुनाव' के लिए एक समिति नियुक्त की है। इस देश में विशाल विविधता है...सबसे छोटे राज्य इसके शिकार होंगे। छोटे राज्यों में सरकार गिराने की संभावनाएं हैं।