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Tamil Nadu: पुझल जेल से रिहा हुए यूट्यूबर 'सुवुक्कू' शंकर, मद्रास हाईकोर्ट से इतने दिन की अंतरिम जमानत मंजूर

Sat, 27 Dec 2025 06:28 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई

सार

YouTuber 'Savukku' Shankar Released: मद्रास उच्च न्यायालय की तरफ से तीन महीने की अंतरिम जमानत दिए जाने के बाद यूट्यूबर और वीडियो पत्रकार सुवुक्कू शंकर को शनिवार को चेन्नई की पुझल केंद्रीय जेल से रिहा कर दिया गया। जानकारी के मुताबिक, शंकर को मेडिकल आधार पर जमानत मिली है।
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यूट्यूबर सुवुक्कू शंकर (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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विस्तार
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यूट्यूबर और वीडियो पत्रकार 'सुवुक्कू' शंकर को मद्रास हाईकोर्ट से तीन महीने की अंतरिम जमानत मिलने के बाद शनिवार को पुझल सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया। शंकर को 13 दिसंबर को उनके चेन्नई स्थित घर से गिरफ्तार किया गया था। उन पर एक फिल्म निर्माता के साथ मारपीट और जबरन वसूली का आरोप लगाया गया था। जेल से बाहर आने के बाद शंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी तस्वीर साझा करते हुए लिखा, 'क्या आपने सोचा था कि मैं हार जाऊंगा?'
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मां की अपील पर मिली जमानत
जानकारी के मुताबिक, शंकर की मां ए. कमला ने अपने बेटे की तबीयत का हवाला देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। उन्होंने बताया कि शंकर को दिल की बीमारी और मधुमेह (डायबिटीज) है और उन्हें इलाज की जरूरत है। इस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एस.एम. सुब्रमणियम और जस्टिस पी. धनबल की वेकेशन बेंच ने 26 दिसंबर 2025 से 25 मार्च 2026 तक 12 हफ्तों के लिए अंतरिम जमानत दी। अदालत ने शंकर को रिहाई के लिए जेल अधीक्षक के सामने एक लाख रुपये का निजी मुचलका भरने का आदेश दिया।
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जमानत के दौरान अदालत ने की कड़ी टिप्पणी
कोर्ट ने कहा कि यह समझना मुश्किल है कि एक ही यूट्यूब पत्रकार को बार-बार कानून प्रवर्तन एजेंसियों की तरफ से जेल क्यों भेजा जा रहा है। इससे यह संदेह पैदा होता है कि कहीं वह सत्तारूढ़ सरकार के निशाने पर तो नहीं हैं। बेंच ने यह भी याद दिलाया कि शंकर के खिलाफ पहले भी गुंडा एक्ट लगाया गया था, जिसे अगस्त 2024 में हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था। इसके तुरंत बाद दूसरा हिरासत आदेश पारित होना असामान्य है और इससे कानून के दुरुपयोग का सवाल उठता है।
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कानून सभी के लिए समान है- हाईकोर्ट
अदालत ने पुलिस पर मानसिक उत्पीड़न और बार-बार परेशान करने जैसे गंभीर आरोपों का भी जिक्र किया और कहा कि कानून की प्रक्रिया का इस्तेमाल किसी खास व्यक्ति को निशाना बनाने के लिए नहीं होना चाहिए। हाईकोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि कानून सभी के लिए समान है और असहमति या आलोचना के कारण किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को बार-बार सीमित करना उचित नहीं है।

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