भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा और कर्मचारियों को प्रताड़ना
अनुबंध आधारित नौकरी प्रणाली में भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने वाला कोई नहीं होगा। कर्मचारी को खुद भी प्रताड़ित होना पड़ेगा। अनुपम बताते हैं कि उसकी आंखों के सामने भ्रष्टाचार होगा, मगर वह चाह कर भी नहीं बोल सकेगा। वजह, उसे पता रहेगा कि आने वाले फलां महीने की उस तारीख को अनुबंध का नवीकरण होना है। हर वक्त उसकी गर्दन पर तलवार लटकी रहेगी। उसे सोशल मीडिया से दूर कर दिया जाएगा। सरकार को चाहिए कि युवाओं को नियंत्रित करने की बजाए उन्हें पक्की नौकरी दी जाए।
सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि लोगों को नियमित रोजगार मिलना चाहिए। इतना ही नहीं, सर्वोच्च अदालत ने यह भी कहा था कि बराबर काम के लिए बराबर वेतन दिया जाए। देश का युवा तभी आगे बढ़ सकेगा, जब उसे सुरक्षित नौकरी की गारंटी मिलेगी।
अब स्थायी नौकरियों पर संकट आ गया है
पहले सरकारों को अनुबंध आधारित नौकरी को नियत अवधि के रोजगार में बदलने की इजाजत नहीं थी। सरकार ने अब नए श्रम कानूनों के अंतर्गत यह कदम उठाया है। 29 सितंबर को अधिसूचित औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 में यह प्रावधान किया गया है कि अब सभी कंपनियां खुद निश्चित समय के लिए अनुबंध आधार पर कर्मचारी रख सकेंगी। पहले इन्हीं कंपनियों को अनुबंध पर कर्मचारी रखने के लिए ठेकेदार के पास जाना पड़ता था।
अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि अनुबंध वाले कर्मियों को वे सभी सुविधाएं दी जाएंगी, जो स्थायी कर्मचारियों को मिलती हैं। ये अलग बात है कि अनुबंध पर काम करने वाले कर्मियों को उनकी सेवा समाप्त किए जाने पर उन्हें स्थायी कर्मियों की तर्ज पर मिलने वाले कई लाभ व मुआवजा आदि नहीं मिलेंगे। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के 2019-19 के सर्वेक्षण के अनुसार भारत में कुल कार्यबल में केवल 4.2 फीसदी को अधिकतम सुरक्षा मिली हुई है। मंत्रालय के एक अधिकारी बताते हैं कि मौजूदा हालात में दुनिया के बदलावों को देखकर सरकार ऐसे कदम उठा रही है। इसमें किसी को नुकसान नहीं है। सरकार ने कर्मियों के हितों का ध्यान रखा है।