कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा चुनाव में भाजपा के पन्ना प्रमुखों को टक्कर देने के लिए यंग ब्रिगेड खड़ी कर दी है। यह ब्रिगेड बूथ स्तर पर जाकर काम कर रही है। वोटरों को भाजपा सरकार की कमियों से अवगत कराना और उनके सामने कांग्रेस पार्टी का घोषणा पत्र रखना, जैसे कार्य ब्रिगेड को सौंपे गए हैं। इसके अलावा ब्रिगेड के सदस्य वोटरों के साथ बैठकर कांग्रेस पार्टी की विचारधारा के बारे में चर्चा करते हैं। वे लोगों को डेमो देकर भी समझाते हैं कि कांग्रेस-भाजपा की विचारधारा में क्या फर्क है। कौन मुद्दों पर बात कर रहा है और कौन बिना मुद्दों के चुनाव मैदान में है। ब्रिगेड के सभी सदस्यों को कांग्रेस सेवा दल ने ट्रेनिंग दी है। इनकी संख्या पांच लाख बताई गई है।
पन्ना प्रमुख क्या है
बता दें कि भाजपा ने 'मेरा बूथ सबसे मजबूत' कार्यक्रम के तहत पन्ना प्रमुखों की नियुक्ति की थी। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह अपनी चुनावी रणनीति में सबसे ज्यादा अहमियत पन्ना प्रमुखों को ही देते रहे हैं।
हालांकि प्रधानमंत्री मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने 2007 के विधानसभा चुनाव में पन्ना प्रमुख बनाने की परंपरा शुरू की थी। कहीं पर 50-60 वोटरों पर तो कहीं वोटर लिस्ट के एक पन्ने पर जितने नाम होते हैं, उन पर एक पन्ना प्रमुख नियुक्त किया जाता है।
अपने हिस्से आए पेज के वोटरों के साथ बातचीत करना और उन्हें मतदान केंद्र तक लाना, यह सब पन्ना प्रमुख की जिम्मेदारियों में शामिल होता है। भाजपा ने गुजरात के बाद कई दूसरे राज्यों में भी पन्ना प्रमुखों का सफल प्रयोग किया है। हालांकि दिल्ली जैसे राज्य में पन्ना प्रमुख नहीं चल पाए थे।
पन्ना प्रमुख का मुकाबला करने के लिए कांग्रेस सेवा दल ने अब अपनी यंग ब्रिगेड तैयार की है। हालांकि अभी तक 28 राज्यों में ही यंग ब्रिगेड खड़ी हो सकी है। बाकी के राज्यों में तेजी से इसका गठन किया जा रहा है।
सेवा दल के राष्ट्रीय महासचिव रामजीलाल का कहना है कि इसके सदस्य जिला, ब्लॉक एवं गांव में जाकर बूथों पर काम कर रहे हैं। वे पांच-दस मिनट तक संबंधित बूथ के वोटरों से मिलते हैं। कांग्रेस पार्टी के घोषणा पत्र को लेकर बात करते हैं।
यदि कहीं एक साथ दर्जनभर वोटर एकत्रित हो जाते हैं तो उनके सामने कांग्रेस और भाजपा के घोषणा पत्र को सामने रखकर एक डेमो भी देते हैं। उसमें वोटरों को बताया जाता है कि कौन सी पार्टी जनहित के किन मददों को उठा रही है।