लक्जमबर्ग के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री जेवियर बेटेल ने भारत के साथ भरोसेमंद और ईमानदार संबंध बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया। इसके साथ ही, उन्होंने भारत के शीर्ष नेतृत्व की तारीफ करते हुए कहा कि आप अपने वादों को पूरा करने में विश्वास रखते हैं जो प्रशंसा के काबिल है।
नई दिल्ली में विदेश मंत्री (ईएएम) एस. जयशंकर के साथ सोमवार को एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, बेटेल ने अपने 13 वर्षों के कार्यकाल पर बात की और भारत-लक्जमबर्ग की ओर से द्विपक्षीय संबंधों को प्रगाढ़ बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों को सराहा।
लक्जमबर्ग के उप-प्रधानमंत्री ने क्या कहा?
उन्होंने कहा, 'जैसा कि आपने अभी कहा, आप अपने पड़ोसियों को नहीं चुन सकते, लेकिन आप अपने दोस्तों को चुन सकते हैं। इसलिए यहां आना भी इसी दोस्ती का हिस्सा है। मुझे सरकार में काम करते 13 साल हो गए हैं और मुझे लगता है कि हमारी सरकार ने दोनों देशों के बीच संबंधों को गहरा करने के लिए बहुत कुछ किया है।'
पीएम के साथ हुए पुराने मुलाकात पर क्या कहा?
बेटेल ने लक्जमबर्ग के प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी के साथ हुई मुलाकात को भी याद किया। उन्होंने कहा, 'मैं बहुत भाग्यशाली था कि बतौर पीएम मेरे आपके प्रधानमंत्री के साथ अच्छे संबंध थे। आजकल लोकतांत्रिक देश होना कोई आम बात नहीं है, और इसके लिए मैं वास्तव में भारतीय लीडरशिप को धन्यवाद देना चाहता हूं।'
कोविड को लेकर क्या कहा?
लक्जमबर्ग के विदेश मंत्री ने कहा, 'आप और प्रधानमंत्री मोदी के बारे में मुझे जो बात पसंद है, वह यह है कि जब आप कुछ कहते हैं, तो आप उसे करते भी हैं, और इस बात की बहुत तारीफ की जाती है। मैंने इसे कोविड के समय देखा था जब हमारे कुछ साझा प्रोजेक्ट थे।
आपके प्रधानमंत्री ने कहा, 'हम इसे करने जा रहे हैं'। आमतौर पर, जब हम यूरोप में ऐसा कहते हैं, तो यह चर्चा की शुरुआत होती है कि हम उस वादे को कैसे पूरा कर सकते हैं। भारत में, यह शुरुआत थी लेकिन अंत भी था क्योंकि अगले ही दिन सब कुछ हो गया था। यही वजह है कि मैं आपके राजनीतिक बयानों की कार्यक्षमता से भी प्रभावित हुआ।'
भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस दी बधाई
बेटेल ने पिछले महीने मनाए गए भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर देश को बधाई भी दी। अपनी बात खत्म करते हुए, बेटेल ने भारत की दोस्ती और लीडरशिप के लिए उसका शुक्रिया अदा किया। साथ ही, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय झगड़ों को सुलझाने और देशों के बीच संबंध बेहतर बनाने के लिए व्यावहारिक नजरिए की अहमियत पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, 'कुछ देश यह नहीं समझते कि जब आप संबंध बेहतर बनाना चाहते हैं, तो व्यावहारिक होना जरूरी है। और इसका मतलब किसी के खिलाफ होना नहीं है; यह लोगों के हित में है।'