सुप्रीम कोर्ट जल्द ही पेपरलेस हो जाएगा और यहां अब ऑनलाइन याचिका भी दर्ज हो सकेगी। चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने कहा कि 1990 के दशक से सुप्रीम कोर्ट को कंप्यूटरीकृत करने की प्रक्रिया अब रंग ला रही है और यह जल्द ही पूरी तरह डिजिटल हो जाएगा।
चीफ जस्टिस ने कहा, हम ई-फाइलिंग की ओर बढ़ रहे हैं। वकील अब दफ्तर में बैठे-बैठे केस फाइल कर सकेंगे। वादियों को सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करते वक्त सिर्फ हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती का आधार बताना होगा और अपनी मांगें बतानी होंगी। जैसे ही सुप्रीम कोर्ट के पास यह मामला आएगा हाईकोर्ट के सारे रिकार्ड डिजिटल माध्यम में सुप्रीम कोर्ट के पास पहुंच जाएंगे।
डिजिटल कोर्ट की ओर बढ़ रहे सुप्रीम कोर्ट को लेकर राजधानी के विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में चीफ जस्टिस ने कहा कि अब याचिकाकर्ताओं को दूसरे पक्ष या सरकारी विभागों में भारी-भरकम दस्तावेज देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। डिजिटल माध्यम से प्रतिवादियों के पास पूरा दस्तावेज पहुंच जाएगा। इससे समय भी बचेगा और पारदर्शिता भी आएगी। उन्होंने कहा कि हर एक फाइलिंग की निगरानी होगी। इस सिस्टम से सभी को फायदा होगा।
वाई-फाई सुविधा की वकालत
न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर ने इस मौके पर कहा कि जब अमेरिकी रक्षा मुख्यालय ‘पेंटागन’ में वाई-फाई की सुविधा है तो सुप्रीम कोर्ट में यह सुविधा क्यों नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी ने चीफ जस्टिस को बताया कि सुप्रीम कोर्ट में वाई-फाई की व्यवस्था होने से सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है और जानकारी लीक हो सकती है। इस कारण सुप्रीम कोर्ट में वाई-फाई की सुविधा नहीं दी गई।