यूपी उपचुनाव के नतीजों पर बोलने आए योगी आदित्यनाथ ने भाजपा की हार स्वीकारते हुए कहा है कि पार्टी का अतिआत्मविश्वास ही उन्हें ले डूबा। यानी भाजपा की तीन सीटों पर हार जिसमें यूपी की दो सीटें शामिल हैं। वो पार्टी के अतिआत्मविश्वास से ढह गईं। बिहार के अररिया को छोड़ कर बात करें तो यूपी में गोरखपुर और फूलपुर दोनों ही लोकसभा सीटें बेहद खास थीं। एक खुद योगी आदित्यनाथ की पारंपरिक सीट गोरखपुर है तो दूसरी भी यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की थी।
योगी आदित्यनाथ ने दोनों लोकसभा सीटों पर बीजेपी की हार को स्वीकार तो किया है लेकिन वो सपा-बसपा गठबंधन पर भी बोलने से नहीं चूके। योगी ने इस गठबंधन को सराहा नहीं बल्कि चुनाव के अंतिम दौर में लिए गए इस फैसले को ही अनैतिक कह डाला। योगी ने कहा कि चुनाव के अंतिम दौर में सपा-बसपा का साथ आना कोई राजनीतिक रूप से सही कदम नहीं है। हार-जीत के लिए सपा-बसपा का इस तरह साथ आना तो योगी को नहीं पच रहा है।
जाहिर है कि भाजपा को ये हार पचाना भारी पड़ेगा। लेकिन सियासी पंड़ितों को मिशन 2019 के लिए कई भविष्य दिखाई देने लगे हैं। सपा-बसपा का गठजोड़ ही लें तो ये कितना दूर जाएगा, अब इस पर बात होने लगी है। यानी इन उपचुनावों से आने वाले लोकसभा 2019 के चुनाव पर कई समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं। योगी का यह बयान की उनकी पार्टी अतिआत्मविश्वास की वजह से हारी है, देखना है की पार्टी आलाकमान के विचारों से कितना मेल खाता है।