केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध को लेकर किसान नेता और समाजशास्त्री योगेंद्र यादव ने सरकार की आलोचना की है। उन्होंने कोलकाता में बुधवार को कहा कि केंद्र के गेहूं निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों से किसानों को नुकसान हो रहा है, लेकिन छूट से निर्यातकों को फायदा मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रतिबंध से मंडियों में गेहूं की कीमतों में गिरावट आई है, जिससे किसानों का नुकसान हो रहा है, जबकि निर्यातक अनाज की शिपमेंट जारी रखते हुए वैश्विक मूल्य सर्पिल का लाभ उठा रहे हैं। इस दौरान जय किसान आंदोलन के नेता योगेंद्र यादव ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य और किसानों के खिलाफ मामले वापस लेने के मुद्दे पर समिति गठित करने के अपने वादे से पीछे हटने का भी आरोप लगाया।
गेहूं की कीमत में आई कमी
स्वराज इंडिया पार्टी के नेता योगेंद्र यादव ने कहा कि निर्यात प्रतिबंध की घोषणा के बाद गेहूं की कीमतों में गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि इस प्रतिबंधों के चलते पहले से ही गर्मी की लहर की चपेट में आने वाले किसानों को और भी ज्यादा नुकसान हुआ है। साथ ही प्रतिबंधों में छूट का मतलब है कि निर्यातक निर्यात और मुनाफा (गेहूं की ऊंची अंतरराष्ट्रीय कीमतों के मुताबिक) जारी रख सकते हैं।
कीमतों में वृद्धि का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि देश से गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध की घोषणा के बाद गेहूं की कीमतें 7 मई को 2,881 रुपये प्रति क्विंटल से गिरकर 13 मई को 2,220 रुपये प्रति क्विंटल हो गईं हैं। दूसरी ओर, अर्जेंटीना के गेहूं की कीमत 475 अमेरिकी डॉलर प्रति टन और यूरोपीय संघ के फ्रांस ग्रेड 1 की कीमत 451 अमेरिकी डॉलर प्रति टन होने से वैश्विक कीमतों में वृद्धि जारी है। प्रतिबंध में छूट के एलान के तहत, जिन निर्यातकों ने 13 मई से पहले बिक्री का अनुबंध किया था, उन्हें प्रतिबंध आदेश से छूट दी गई और बिक्री जारी रखने की अनुमति दी गई है।
उच्च एमएसपी की गारंटी देने वाले कानून के लिए फिर से होगा आंदोलन
योगेंद्र यादव ने यह भी चेतावनी दी कि वास्तविक लागत के आधार पर उच्च एमएसपी की गारंटी देने वाले कानून के लिए आंदोलन फिर से शुरू किया जाएगा। क्योंकि सरकार किसानों के खिलाफ मामले वापस लेने या इस मुद्दे को हल करने के लिए एक समिति गठित करने के अपने वादे में विफल रही।
ममता बनर्जी से की यह अपील
योगेंद्र यादव ने कहा कि सभी फसलों के लिए एमएसपी के बारे में कानूनी गारंटी होनी चाहिए। लेकिन, आश्वासन के बावजूद केंद्र ने सभी 23 सूचीबद्ध फसलों के लिए भी आवश्यक नोटिस जारी नहीं किया है। मैं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से यह सुनिश्चित करने का आग्रह करता हूं कि उनकी पार्टी टीएमसी एमएसपी की मांग के बारे में समर्थन प्रदान करे।
वहीं किसानों के आंदोलन को लेकर उन्होंने कहा कि जब इस बार आंदोलन होगा तो यह केवल उत्तर भारत तक सीमित नहीं रहेगा। किसान संगठन चाहते हैं कि बंगाल, ओडिशा और तेलंगाना भी आंदोलन को लेकर आगे आएं।