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Year Ender 2024: देश में बरपा कुदरत का कहर; कहीं तूफान तो कहीं बाढ़ ने ली परीक्षा, इतिहास का सबसे गर्म साल भी

Tue, 31 Dec 2024 07:23 AM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

इस साल से अगर कुछ याद आता है तो इतिहास का सबसे गर्म साल, वायनाड भूस्खलन, तूफान और भीषण बाढ़। अगर कहा जाए 2024 भारत के लिए प्राकृतिक आपदाओं का साल रहा, तो कोई झूठ नहीं होगा। आइए जानते हैं इस साल के सबसे भयानक प्राकृतिक आपदाओं के कहर के बारे में....
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देश पर रहा कुदरती कहर - फोटो : अमर उजाला
कुछ ही दिन बाद 2024 अलविदा कहने वाला है और नया साल आने वाला है। इस साल से अगर कुछ याद आता है तो इतिहास का सबसे गर्म साल, वायनाड भूस्खलन, चक्रवात फेंगल, तूफान रेमल और कई राज्यों में आई भीषण बाढ़। अगर कहा जाए यह वर्ष भारत के लिए प्राकृतिक आपदाओं का साल रहा, तो कोई झूठ नहीं होगा। खतरनाक आपदाओं की घटनाओं ने कई लोगों की जान ले ली, हजारों बेघर हो गए और कई जगहों पर जनजीवन ठप हो गया।आइए जानते हैं 2024 में सबसे भयानक प्राकृतिक आपदाओं के कहर के बारे में, जिन्होंने पूरे देश को हिला कर रख दिया। 

 
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दुनिया के इन देशों पर भी प्राकृतिक ने बरपाया कहर

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2024 कुदरती कहर का साल - फोटो : अमर उजाला
भारत में आई आपदाओं के बारे में बात करने से पहले दुनिया के अन्य देशों की भी बात कर लेते हैं। इस साल दुनिया भर में भी भयानक प्राकृतिक आपदाएं देखने को मिलीं। इटली और दक्षिणी अमेरिका में सूखा पड़ा, जबकि नेपाल, सूडान और यूरोप में बाढ़ ने तबाही मचाई। मैक्सिको, माली और सऊदी अरब में हीटवेव के कारण हजारों लोग अपनी जान गंवा बैठे। वहीं, अमेरिका और फिलीपींस जैसे देशों में विनाशकारी साइक्लोन ने कहर ढाया। वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी घटनाएं आने वाले समय में और ज्यादा गंभीर हो सकती हैं। 
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इतिहास का सबसे गर्म साल

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गर्मी से बेहाल बुजुर्ग - फोटो : एएनआई
यूरोपियन यूनियन की कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (C3S) ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया था। उसके अनुसार, साल 2024 इतिहास का सबसे गर्म साल रहा। जनवरी से नवंबर तक का औसत वैश्विक तापमान प्री-इंडस्ट्रियल एरा (1850-1900) की तुलना में 1.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा। बता दें कि इससे पहले 2023 को सबसे गर्म साल के तौर पर दर्ज किया गया था। विशेषज्ञों के मुताबिक ये बढ़ती गर्मी इंसानों द्वारा किए गए जलवायु परिवर्तन का सीधा नतीजा है। 

बाढ़ से बेहाल आंध्र प्रदेश का विजयवाड़ा

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बेहाल विजयवाड़ा - फोटो : एएनआई
भारी बारिश और उफनती नदियों के कारण आंध्र प्रदेश के शहर विजयवाड़ा में आई बाढ़ ने इस साल 40 से ज्यादा लोगों की जान ले ली। इतना ही नहीं तीन लाख के करीब लोग इस बाढ़ से प्रभावित हुए थे। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो, 31 अगस्त-नौ सितंबर इस बाढ़ का प्रकोप रहा था। बता दें, बुडामेरु नदी और उफनती कृष्णा नदी के कारण निचले इलाकों में पानी भर गया था। इसके बाद मौके पर राहत टीम पहुंची और 44,000 से अधिक विस्थापित निवासियों को आश्रय दिया।
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चक्रवात 'रेमल' ने मचाई तबाही

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रेमल के बाद इलाकों में भरा पानी - फोटो : एएनआई
तूफान रेमल 2024 के उत्तर भारतीय महासागर चक्रवात, सीजन का पहला तूफान था। जो 26 मई को पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के सुंदरबन डेल्टा क्षेत्र में आया था। तूफान ने बंगाल, मिजोरम, असम और मेघालय में कम से कम 30 से ज्यादा लोगों की जान ले ली और चारों ओर विनाश के निशान छोड़े।
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वायनाड भूस्खलन: मलबे से आ रही थीं मदद मांगती आवाजें

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वायनाड के हाल-बेहाल - फोटो : एएनआई
केरल के वायनाड जिले के लोग इस साल की 30 जुलाई को कभी भुला नहीं पाएंगे। जब यहां मेप्पाडी के पास विभिन्न पहाड़ी इलाकों में आए भूस्खलन ने भारी तबाही मचा दी थी। इस प्राकृतिक आपदा के कारण 300 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। बता दें, वायनाड जिले के मुंडक्कई, चूरलमाला और मलप्पुरम जिले के नीलांबुर वन क्षेत्र में भूस्खलन हुआ था। भूस्खलन होने के बाद तबाह हुए घरों और मलबे के ढेर के बीच फंसे लोग फोन करके मदद की गुहार लगा रहे थे। इस साल के सबसे खतरनाक भूस्खलन के कारण 1,500 से अधिक घर क्षतिग्रस्त हो गए और हजारों लोग विस्थापित हो गए।
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हिमाचल प्रदेश में दो महीने के अंदर 51 बार फटे बादल

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हिमाचल प्रदेश में बादल फटने के बाद बिगड़े हालात - फोटो : एएनआई
जून से अगस्त तक हिमाचल प्रदेश में 51 बार बादल फटने और बाढ़ की घटनाएं हुईं। इस आपदा में कम से कम 30 लोगों की मौत हुई और कई लोग लापता हो गए। इस प्राकृतिक आपदा से जिन क्षेत्रों को सबसे अधिक प्रभाव पड़ा था, उनमें लाहौल और स्पीति शामिल हैं। इस दौरान 121 घर नष्ट हो गए और 35 भूस्खलन हुए। इस आपदा से राज्य को करीब 1,140 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

फेंगल तूफान: भूस्खलन... उखड़े पेड़... रिकॉर्ड तोड़ बारिश

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फेंगल ने मचाई तबाही - फोटो : एएनआई
30 नवंबर को तूफान फेंगल ने पुडुचेरी के पास दस्तक दी, जिससे कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य प्रभावित हुए। तूफान के कारण पुडुचेरी में 46 सेमी की रिकॉर्ड तोड़ बारिश हुई, जिससे सड़कें और खेत- खलिहान सब पानी में डूब गए। तूफान के चलते तमिलनाडु के कई जिलों में फसलों को भारी नुकसान पहुंचा। जहां चक्रवाती तूफान फेंगल ने पुडुचेरी में भारी तबाही मचाई, वहीं इस तूफान का असर महाराष्ट्र में भी दिखा।
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'जलप्रलय' से बेहाल असम

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बाढ़ के बाद नाव पर सवार लोग - फोटो : एएनआई
इस साल देश के पूर्वोत्तर भारत में भी भारी बारिश और बाढ़ से बुरा हाल था। दूर-दूर तक.. जहां तक नजर जाए बस पानी ही पानी था। यहां ये फर्क करना मुश्किल था कि नदी का दूसरा किनारा कहां है और गांव की सरहद किधर है। सड़क, रास्ते, पगडंडियां सब सैलाब में डूब चुकी थीं। असम में इस साल आई भयंकर बाढ़ में 117 लोगों की मौत हुई। यहां तक 21 लाख से अधिक लोगों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई थी। हर साल की तरह इस बार भी ये पूर्वोत्तर राज्य ब्रह्मपुत्र नदी का प्रकोप झेल रहा था।
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