कर्नाटक के मुख्यमंत्री के बेटे और कांग्रेस एमएलसी यतींद्र सिद्धारमैया ने सोमवार को अपने उस बयान का बचाव किया, जिसमें उन्होंने अपने पिता की मैसूर के लिए शुरू की गई योजनाओं की तुलना नलवाड़ी कृष्णराज वाडियार से की थी। उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत समझा गया है और उनका किसी भी तरह से महाराजा वाडियार के योगदान को कम आंकने या उनका अपमान करने का कोई इरादा नहीं था।
मैसूर के 24वें महाराजा थे नलवाड़ी कृष्णराज वाडियार
कांग्रेस एमएलसी ने विपक्ष की ओर से की जा रही माफी मांग को भी खारिज किया और कहा कि उनके मन में नलवाड़ी कृष्णराज वाडियार के प्रति गहरा सम्मान है। वाडियार 1884 से 1940 तक मैसूर राज्य के 24वें महाराजा थे।
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'वाडियार का अपमान करना नहीं था मेरा इरादा'
यतींद्र ने पहले कहा था कि उनके पिता सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने मैसूर को जितना अनुदान दिया है और जो विकास कार्य किए हैं, वह नलवाड़ी कृष्णराज वाडियार के योगदान के बराबर हैं या संभवना है उससे भी ज्यादा हों। उन्होंने कहा, मेरे बयान को गलत समझा गया है। मेरा इरादा नलवाड़ी कृष्णराज वाडियार का अपमान करना नहीं था। उनका तत्कालीन मैसूर राज्य या आज के कर्नाटक में बहुत बड़ा योगदान रहा है। मेरा इरादा उनके योगदान को कम आंकना नहीं था, बल्कि हमारी सरकार के कार्यों की चर्चा करना था।
'मैसूर को मेरे पिता ने दिया सबसे ज्यादा अनुदान'
पत्रकारों से बात करते हुए यतींद्र ने कहा कि नलवाड़ी कृष्णराज वाडियार के बाद अगर किसी मुख्यमंत्री या सरकार ने मैसूर को सबसे ज्यादा अनुदान दिया है, तो वह कांग्रेस सरकार और सिद्धारमैया ही हैं। उन्होंने कहा, विपक्ष आंकड़े देख सकता है। किसी भी मुख्यमंत्री ने मैसूर को उतना अनुदान नहीं दिया जितना मेरे पिता ने दिया है। मैंने सिर्फ यही कहा था। जब उनसे माफी मांगने की विपक्ष की मांग के बारे में पूछा गया, तो यतींद्र ने कहा कि इसकी कोई जरूरत नहीं है। उनके पहले के बयान की काफी आलोचना हुई थी, खासकर विपक्षी भाजपा और जेडीएस की ओर से। विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने मांग की थी कि यतींद्र माफी मांगें।
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शाही परिवार के वंशज ने कहा- जनता जवाब देगी
नलवाड़ी कृष्णराज वाडियार को राज्य में, खासकर पुराने मैसूर क्षेत्र (जो अब कर्नाटक के 14 जिलों में फैला है) में बहुत सम्मान के साथ देखा जाता है। यतींद्र के माफी न मांगने पर प्रतिक्रिया देते हुए मैसूर से भाजपा सांसद और शाही परिवार के वंशज यदुवीर कृष्णदत्त चामराज वाडियार ने कहा कि वह इस पर ज्यादा टिप्पणी नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि जनता इसका जवाब देगी।
आप अच्छे काम करें, तुलना करने की जरूरत नहीं: कृष्णदत्त चामराज
उन्होंने कहा, यह लोगों के लिए भावनात्मक मुद्दा है। मैंने पहले भी कहा है – अगर आपके पास नेतृत्व है तो आप अच्छे काम करें, तुलना करने की जरूरत नहीं है। मैं भी अपने काम को किसी पुराने नेता से ज्यादा करने के मकसद से नहीं कर रहा हूं, बल्कि लोगों से किए गए वादों और उनकी उम्मीदों को पूरा करने के लिए कर रहा हूं। उन्होंने यह भी कहा कि माफी मांगना एक स्वाभाविक चीज है और यतींद्र को तथ्य जानकर स्वयं माफी मांगनी चाहिए।