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अध्ययन: कोविड टीके के बाद बेचैनी, शोधकर्ताओं ने Covid-19 टीकाकरण के बाद सीने में जलन की धारणाओं को किया खारिज

Sun, 07 May 2023 06:03 AM IST
वीरेंद्र शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अमेरिका स्थित येल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया कि टीका लगने के बाद कुछ लोगों का प्रतिरक्षा तंत्र कुछ ज्यादा मजबूत हुआ तो बड़ी मात्रा में साइटोकाइन का उत्पादन होने लगा और कोशिकाओं ने सामान्य रूप से उसी के मुताबिक प्रतिक्रिया दी।
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कोविड-19 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोविड-19 टीकाकरण के बाद आम तौर पर लोगों को थोड़ी बेचैनी और सीने में जलन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा था। पहले माना जा रहा था कि वैक्सीन लगने के बाद बनी एंटीबॉडी इसकी वजह हो सकती है, लेकिन अध्ययन में पता चला है कि यह प्रतिरक्षा कोशिकाओं की सामान्य प्रतिक्रिया थी।
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अमेरिका स्थित येल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया कि टीका लगने के बाद कुछ लोगों का प्रतिरक्षा तंत्र कुछ ज्यादा मजबूत हुआ तो बड़ी मात्रा में साइटोकाइन का उत्पादन होने लगा और कोशिकाओं ने सामान्य रूप से उसी के मुताबिक प्रतिक्रिया दी। साइंस इम्यूनोलॉजी जर्नल में प्रकाशित अपने अध्ययन में शोधकर्ताओं ने टीकाकरण के बाद सीने में जलन होने को लेकर बनी कुछ धारणाओं को खारिज कर दिया। साथ ही बहुत ही कम लोगों में नजर आने इस दुष्प्रभाव की घटनाओं में कमी लाने के उपाय सुझाए हैं।

मायोकार्डिटिस मामलों पर किया अध्ययन
ताजा शोध में येल के शोधकर्ताओं ने टीका लगवाने वाले उन लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिक्रिया पर गंभीरता से विश्लेषण किया, जिनमें मायोकार्डिटिस के दुर्लभ मामले सामने आए थे। पिछले शोध में इस तरह के सुझाव भी दिए गए थे कि टीके की दो खुराकों के बीच का समय चार से बढ़ाकर आठ सप्ताह तक करने से मायोकार्डिटिस का जोखिम घट सकता है। अब शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि ताजा निष्कर्षों से भविष्य में इस महामारी से बचाने वाले एमआरएनए टीकों को और अधिक बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
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टीका ही बचाव का सबसे बेहतर रास्ता
यूनिवर्सिटी में इम्युनोबायोलॉजी की एसोसिएट प्रोफेसर और प्रमुख शोधकर्ता कैरी लुकास ने कहा कि अमेरिका स्थित सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के निष्कर्ष बताते हैं कि टीका लगवा चुके लोगों की तुलना में टीका न लगवाने वाले लोगों के कोविड-19 वायरस की चपेट में आने पर मायोकार्डिटिस का जोखिम काफी अधिक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यही वजह है कि टीकाकरण कोविड-19 से सबसे बेहतर सुरक्षा प्रदान करता है।

गौरतलब है कि दो साल पहले जब कोविड-19 के टीके लगना शुरू हुए थे तो सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने मायोकार्डिटिस के मामलों में वृद्धि देखी थी। इसकी वजह से कुछ लोगों, खासकर 20 के दशक की शुरुआत वाले उन पुरुषों के हृदय की मांसपेशियों में सूजन और जलन की समस्या सामने आई थी, जिन्हें कोविड-19 वायरस से लड़ने के लिए तैयार एमआरएनए टीका लगाया गया था। हालांकि, इस बारे में स्पष्ट तौर पर कुछ पता नहीं चल पाया था कि इसकी वजह क्या हो सकती है।
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