चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स रात्रिभोज में हिस्सा नहीं लिया। सूत्रों के मुताबिक, चीन की ओर से विदेश मंत्री वांग यी ने रात्रिभोज में प्रतिनिधित्व किया। यह रात्रिभोज शनिवार को भारत मंडपम में आयोजित किया गया था, जहां 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन हुआ।
वांग यी चीन के उस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं, जो ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत आया है। सूत्रों ने बताया कि उन्होंने रात्रिभोज में चीन की ओर से भाग लिया। हालांकि, शी जिनपिंग ने शनिवार को ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन की कार्यवाही में हिस्सा लिया और प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की।
द्विपक्षीय बैठक में दोनों नेताओं के बीच हुई क्या बातचीत?
इस बैठक में दोनों नेताओं ने भारत-चीन संबंधों को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। शी जिनपिंग ने कहा कि दोनों देशों को अपने द्विपक्षीय संबंधों को दीर्घकालिक विकास को ध्यान में रखते हुए रणनीतिक नजरिये से देखना चाहिए। शी ने कहा, 'चीन-भारत संबंध विकसित हुए हैं और दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों के दीर्घकालिक विकास को ध्यान में रखते हुए रणनीतिक नजरिया अपनाया है।'
उन्होंने कहा कि चीन और भारत अलग-अलग देश हैं, लेकिन दोनों एक-दूसरे का समर्थन और मदद करते हुए साझा विकास हासिल करने में सक्षम रहे हैं। चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि 12 वर्षों में यह उनकी नई दिल्ली की दूसरी यात्रा है। इस दौरान दोनों नेता 20 से अधिक बार मिल चुके हैं और इन बैठकों से कई महत्वपूर्ण सहमतियां बनी हैं।
सीमा विवाद के समाधान के लिए जताई प्रतिबद्धता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक के दौरान भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान चीन से मिले समर्थन और सहयोग के लिए आभार जताया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'आपका स्वागत करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आपकी सकारात्मक टिप्पणियों के लिए बहुत धन्यवाद। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान चीन से मिले समर्थन और सहयोग के लिए मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं।' उन्होंने आगे कहा, 'अब हमारे पास द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा करने का अवसर है। एक बार फिर भारत में आपका स्वागत है।'
दोनों नेताओं ने भारत-चीन सीमा विवाद के निष्पक्ष, उचित और दोनों पक्षों को स्वीकार्य समाधान के लिए प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने यह भी दोहराया कि द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिये से देखा जाना चाहिए। दोनों नेताओं ने अगस्त 2025 में तियानजिन में हुई पिछली बैठक के बाद भारत-चीन संबंधों में हुई लगातार प्रगति का भी स्वागत किया।
दोनों पक्षों का जोर- विवाद में नहीं बदलने चाहिए मतभेद
विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि 'मतभेद विवाद में नहीं बदलने चाहिए।' साथ ही दोनों देशों को 'आपसी सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और आपसी हित' के सिद्धांतों से मार्गदर्शित होना चाहिए। रात्रिभोज में भारत के अलग-अलग क्षेत्रों के खास व्यंजन भी परोसे गए। शाकाहारी भोजन की शुरुआत खांडवी मिले-फुई और खुंब गलौटी से हुई। खांडवी बेसन से बना व्यंजन था, जिसे सरसों, नारियल और करी पत्ते का तड़का दिया गया था। खुंब गलौटी में पैन पर सेंके गए मशरूम कबाब को पुदीने के मोती और शीरमाल के साथ परोसा गया।