टीबी (क्षय रोग) से देश के करोड़ों लोगों को मुक्त कराने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2025 तक का वक्त निश्चित किया है, लेकिन इससे पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय छोटे राज्यों को इस जानलेवा बीमारी से मुक्त करा सकता है। विश्व टीबी दिवस के मौके पर मंत्रालय इसकी जानकारी भी साझा कर सकता है।
शनिवार को सुबह नई दिल्ली स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में केंद्रीय राज्य स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी चौबे और अनुप्रिया पटेल टीबी की एक रिपोर्ट भी साझा करेंगे। सूत्रों की मानें तो इस रिपोर्ट में पिछले कुछ वर्षों की उपलब्धि सरकार बताना चाहती है।
मंत्रालय के एक अधिकारी ने ताजा रिपोर्ट अमर उजाला से साझा करते हुए बताया कि पिछले तीन माह में देश में टीबी के करीब ढाई लाख मरीजों की पहचान हो चुकी है। इसमें सबसे ज्यादा करीब 44 हजार मरीज उत्तर प्रदेश से हैं।
उन्होंने ये भी बताया कि करीब एक दर्जन राज्य ऐसे हैं, जहां टीबी मरीजों की संख्या सिर्फ सैकड़ों में है। इन राज्यों पर फोकस किया जा रहा है। उम्मीद है कि 2022 तक इन राज्यों में टीबी के सभी मरीजों का इलाज पूरा हो सकेगा। फिर पोलिया और ट्रेकोमा की तरह भारत टीबी पर भी जीत हासिल कर लेगा।
देश में 28 लाख मरीज
देश में टीबी से करीब 28 लाख मरीज पीड़ित हैं। इनमें से ज्यादातर का इलाज किया जा रहा है। वहीं हर दिन चार से छह हजार नए केस मिल रहे हैं। इनसे साबित होता है कि टीबी की स्क्रीनिंग का काम जमीनी स्तर पर काफी बेहतर चल रहा है। हालांकि अब भी यह बीमारी हर साल चार लाख लोगों की जान ले लेती है।