वो 24 दिसम्बर 1906 की शाम थी जब कनाडाई वैज्ञानिक रेगिनाल्ड फेसेंडेन ने अपना वॉयलिन बजाया, जिसके बाद अटलांटिक महासागर में तैर रहे तमाम जहाजों के रेडियो ऑपरेटरों ने उस संगीत को अपने रेडियो सेट पर सुना, यह दुनिया में रेडियो प्रसारण की शुरुआत थी।
वैसे तो रेडियो की शुरुआत जगदीश चन्द्र बसु ने भारत में तथा गुल्येल्मो मार्कोनी ने सन 1900 में ही कर दी थी लेकिन एक से अधिक व्यक्तियों को एक साथ संदेश भेजने या ब्रॉडकास्टिंग की शुरुआत 1906 में फेसेंडेन के साथ हुई। उस समय रेडियो का प्रयोग केवल नौसेना तक ही सीमित था।
1918 में ली द फोरेस्ट ने न्यूयॉर्क के हाईब्रिज इलाके में दुनिया का पहला रेडियो स्टेशन शुरु किया था जोकि बाद में किसी वजह से बंद हो गया। एक साल बाद 1919 में फोरेस्ट ने एक और रेडिया स्टेशन शुरू किया। हालांकि पहली बार रेडियो को कानूनी रूप से मान्यता 1920 में मिली, जब नौसेना के रेडियो विभाग में काम कर चुके फ्रैंक कॉनार्ड को रेडियो स्टेशन शुरु करने की अनुमति मिली।
पहली बार रेडियो में विज्ञापन की शुरुआत 1923 में हुई। इसके बाद ब्रिटेन में बीबीसी और अमेरिका में सीबीएस और एनबीसी जैसे सरकारी रेडियो स्टेशनों की शुरुआत हुई। नवंबर 1941 में सुभाष चंद्र बोस ने रेडियो पर जर्मनी से भारतवासियों को संबोधित किया था।
भारत में रेडियो ब्रॉडकास्ट की शुरुआत 1923 में हुई थी। 1930 में 'इंडियन ब्रॉडकास्ट कंपनी' (IBC) दिवालिया हो गई थी और उसे बेचना पड़ा। इसके बाद 'इंडियन स्टेट ब्रॉडकास्टिंग सर्विस' को बनाया गया था। 1936 में भारत में सरकारी ‘इम्पेरियल रेडियो ऑफ इंडिया’ की शुरुआत हुई जो आजादी के बाद ऑल इंडिया रेडियो या आकाशवाणी बन गया।
आपको बता दें कि देश में आकाशवाणी के 420 स्टेशन हैं, जिनकी 92% क्षेत्र में 99.19% आबादी तक पहुंच है। आकाशवाणी से 23 भाषाओं और 14 बोलियों में पूरे देश में प्रसारण होता है। आपको बता दें कि देश में 214 सामुदायिक रेडियो प्रसारण केंद्र (कम्युनिटी रेडियो) हैं।