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त्रिपुराः बीजेपी में शामिल मुस्लिम परिवारों को मस्जिद में जाने से रोका

Tue, 13 Feb 2018 04:37 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अगरतला
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- फोटो : File Photo
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त्रिपुरा में 18 फरवरी को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होगा। ऐसे में कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही पार्टियां कमर कसकर प्रचार प्रसार में जुटी हुई हैं। राज्य की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार अपनी सत्ता बचाये रखने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही है। इस बीच एक खबर दक्षिणी त्रिपुरा से आई है।
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यहां के शांतिबाजार संसदीय क्षेत्र में एक छोटा सा गांव है मोयदातिला, जहां के मुस्लिम परिवारों के साथ मुस्लिम समुदाय अछूतों सा व्यवहार कर रहा है। इस गांव में सिर्फ 100 परिवार हैं जिसमें 83 परिवार मुस्लिमों के हैं। इसमें से 25 मुस्लिम परिवारों ने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली, जिसके बाद गांव के बाकी मुस्लिम परिवारों ने उनका बहिष्कार कर दिया। अब उन परिवारों को मस्जिद में भी नहीं घुसने दिया जा रहा है।

भाजपा सदस्य बाबुल हुसैन ने बताया कि उनके साथ कुछ परिवार डेढ़ साल पहले बीजेपी में शामिल हुए थे। तभी हमें कह दिया गया था कि हमें यहां नवाज पढ़ने नहीं दी जाएगी। बाबुल ने बताया कि मस्जिद के मौलाना ने कहा कि हम हिंदूवादी पार्टी का समर्थक हैं और मस्जिद में ऐसे लोगों का घुसना मना है। हुसैन आलू व्यापारी हैं और खुदरा बाजार में आलू बेचकर अपना परिवार चलाते हैं।
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मोयदातिला गांव के 25 परिवार वालों ने अब बांस और टीन की सहायता से एक नई मस्जिद बनाई है। हुसैन ने कहा कि हमें नहीं पता कि बीजेपी हिंदुत्व पार्टी है। मैं नहीं जानता कि देश के किसी भी कोने में बीजेपी समर्थकों ने मुस्लिमों पर हमला किया है।

यह सिर्फ कांग्रेस और सीपीएम द्वारा फैलाई गई अफवाह है। अगर कोई मुस्लिम मारा गया है किसी विवाद में तो इसका ये मतलब बिलकुल नहीं लगाया जाना चाहिए कि बीजेपी वालों ने उन्हें मारा है, मैं कहना चाहता हूं कि जरूर मुस्लिमों ने ही कुछ गलत किया होगा। कोई किसी अच्छे आदमी को क्यों मारेगा?

फारूक इस्लाम भी बीजेपी में शामिल हुए हैं उन्होंने कहा कि मेरा परिवार सीपीएम का समर्थक रहा है लेकिन अब हमने सोच लिया है कि हम बीजेपी का समर्थन करेंगे। हम इतने सालों से सीपीएम का समर्थन करते रहे लेकिन हमारे गांव में न तो बिजली है और न पीने का पानी। उसने बताया कि सीपीएम के नेता अब घमंडी हो गए हैं। वो हमें हमारी मस्जिद का निर्माण नहीं करने दे रहे हैं। 

भानू बीबी ने कांग्रेस टिकट से पंचायत चुनाव भी लड़ा था और वह एक वोट से हार गई थीं। भानू ने बताया कि मनरेगा के लिए उसे 35 दिन का पैसा नहीं दिया गया है। परिवार वालों के पास नौकरी नहीं है हमारे गांव में आज भी जरूरत तक पूरी नहीं कर सकी है ये सरकार। इसलिए हमने बीजेपी शामिल होने का फैसला लिया।
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