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विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस 2019: विश्वसनीय जानकारी के बिना अधूरा है हर देश का लोकतंत्र

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Fri, 03 May 2019 01:58 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

3 मई को दुनिया भर में विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है। यूनेस्को महासम्मेलन की अनुशंसा के बाद दिसंबर 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 3 मई को प्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाने की घोषणा की थी। तभी से हर साल 3 मई को ये दिन मनाया जाता है। इस बार इसकी थीम है 'लोकतंत्र के लिए मीडिया: फर्जी खबरों और सूचनाओं के दौर में पत्रकारिता एवं चुनाव'। 

हालांकि हर साल इसकी एक अलग थीम होती है। बीते साल फर्जी खबरों का मुद्दा दुनिया के सामने एक चुनौती बनकर उभरा था। जिससे ना केवल भारत बल्कि दुनियाभर के देशों को कई संकटों का सामना करना पड़ा। फर्जी खबरों का असर ना केवल चुनाव पर पड़ता है। बल्कि इससे अपराधों में भी वृद्धि होती है। लेकिन फर्जी खबरों की परेशानी से निपटने के लिए दुनियाभर की मीडिया ने बड़े कदम उठाए हैं।



यह भी पढ़ेंः बम धमाके की कवरेज करने श्रीलंका गया भारतीय पत्रकार गिरफ्तार

आज के दौर में आप किसी भी मीडिया प्लैटफॉर्म पर देख सकते हैं, वहां आपको अलग से एक ऐसा कॉलम मिल जाएगा, जो फर्जी खबरों की पोल खोलता है। सोशल मीडिया के दौर में फर्जी खबरें तेजी से फैलती हैं और बड़ी संख्या में लोग इनपर विश्वास भी कर लेते हैं। लेकिन मीडिया संस्थानों की उस फर्जी खबर पर की गई पड़ताल आने वाली परेशानी को वक्त पर खत्म कर देती है।

क्यों मनाया जाता है ये दिन?

इस दिवस का उद्देश्य प्रेस की आजादी के महत्व के प्रति जागरूकता फैलाना है। साथ ही ये दिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बनाए रखने और उसका सम्मान करने की प्रतिबद्धता की बात करता है। बता दें इस दिवस की मेजबानी हर साल अलग-अलग देश करते हैं। 

प्रेस की आजादी के महत्व के लिए दुनिया को आगाह करने वाला ये दिन बताता है कि लोकतंत्र के मूल्यों की सुरक्षा और उसे बहाल करने में मीडिया अहम भूमिका निभाता है। इस कारण सरकारों को पत्रकारों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी चाहिए। 

पहली बार कब मनाया गया ये दिन?

अफ्रीका के पत्रकारों ने प्रेस की आजादी के लिए साल 1991 में पहल की थी। उन पत्रकारों ने 3 मई को प्रेस की आजादी के सिद्धांतों से संबंधित एक बयान जारी किया था, जिसे डिक्लेरेशन ऑफ विंडहोक के नाम से जाना जाता है। जिसके बाद पहली बार 1993 को संयुक्त राष्ट्र ने ये दिवस मनाने की घोषणा की।

इस बार विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम का आयोजन इथोपिया की राजधानी आदिस अबाबा में होगा। इस कार्यक्रम में यूनेस्को और इथोपिया सरकार भी योगदान करेंगे। इस दौरान उन चुनौतियों पर प्रकाश डाला जाएगा, जिनका सामना चुनावों के दौरान मीडिया को करना पड़ता है। साथ ही शांति और समृद्धि को बहाल करने में मीडिया की क्या भूमिका है, इसपर भी चर्चा की जाएगी।

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भारत में भी इस मौके पर स्वतंत्र और निष्पक्ष मीडिया के महत्व पर सेमिनारों और परिचर्चाओं का आयोजन किया जाएगा। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
3 मई को दुनिया भर में विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है। यूनेस्को महासम्मेलन की अनुशंसा के बाद दिसंबर 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 3 मई को प्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाने की घोषणा की थी। तभी से हर साल 3 मई को ये दिन मनाया जाता है। इस बार इसकी थीम है 'लोकतंत्र के लिए मीडिया: फर्जी खबरों और सूचनाओं के दौर में पत्रकारिता एवं चुनाव'। 

हालांकि हर साल इसकी एक अलग थीम होती है। बीते साल फर्जी खबरों का मुद्दा दुनिया के सामने एक चुनौती बनकर उभरा था। जिससे ना केवल भारत बल्कि दुनियाभर के देशों को कई संकटों का सामना करना पड़ा। फर्जी खबरों का असर ना केवल चुनाव पर पड़ता है। बल्कि इससे अपराधों में भी वृद्धि होती है। लेकिन फर्जी खबरों की परेशानी से निपटने के लिए दुनियाभर की मीडिया ने बड़े कदम उठाए हैं।

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आज के दौर में आप किसी भी मीडिया प्लैटफॉर्म पर देख सकते हैं, वहां आपको अलग से एक ऐसा कॉलम मिल जाएगा, जो फर्जी खबरों की पोल खोलता है। सोशल मीडिया के दौर में फर्जी खबरें तेजी से फैलती हैं और बड़ी संख्या में लोग इनपर विश्वास भी कर लेते हैं। लेकिन मीडिया संस्थानों की उस फर्जी खबर पर की गई पड़ताल आने वाली परेशानी को वक्त पर खत्म कर देती है।

क्यों मनाया जाता है ये दिन?

इस दिवस का उद्देश्य प्रेस की आजादी के महत्व के प्रति जागरूकता फैलाना है। साथ ही ये दिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बनाए रखने और उसका सम्मान करने की प्रतिबद्धता की बात करता है। बता दें इस दिवस की मेजबानी हर साल अलग-अलग देश करते हैं। 

प्रेस की आजादी के महत्व के लिए दुनिया को आगाह करने वाला ये दिन बताता है कि लोकतंत्र के मूल्यों की सुरक्षा और उसे बहाल करने में मीडिया अहम भूमिका निभाता है। इस कारण सरकारों को पत्रकारों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी चाहिए। 

पहली बार कब मनाया गया ये दिन?

अफ्रीका के पत्रकारों ने प्रेस की आजादी के लिए साल 1991 में पहल की थी। उन पत्रकारों ने 3 मई को प्रेस की आजादी के सिद्धांतों से संबंधित एक बयान जारी किया था, जिसे डिक्लेरेशन ऑफ विंडहोक के नाम से जाना जाता है। जिसके बाद पहली बार 1993 को संयुक्त राष्ट्र ने ये दिवस मनाने की घोषणा की।

इस बार विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम का आयोजन इथोपिया की राजधानी आदिस अबाबा में होगा। इस कार्यक्रम में यूनेस्को और इथोपिया सरकार भी योगदान करेंगे। इस दौरान उन चुनौतियों पर प्रकाश डाला जाएगा, जिनका सामना चुनावों के दौरान मीडिया को करना पड़ता है। साथ ही शांति और समृद्धि को बहाल करने में मीडिया की क्या भूमिका है, इसपर भी चर्चा की जाएगी।

भारत में भी इस मौके पर स्वतंत्र और निष्पक्ष मीडिया के महत्व पर सेमिनारों और परिचर्चाओं का आयोजन किया जाएगा। 

प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : File Photo

क्यों मनाया जाता है?

दुनियाभर में पत्रकारों को तरह-तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सऊदी पत्रकार जमाल खशोगी, भारतीय पत्रकार गौरी लंकेश और उत्तरी आयरलैंड की पत्रकार लायरा मक्की की हत्याओं ने एक बार फिर प्रेस की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। 

दुनियाभर में पत्रकारों और प्रेस को उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। अगर कोई मीडिया संस्थान सरकार की मर्जी से नहीं चलता तो उसे तरह-तरह से प्रताड़ित किया जाता है। मीडिया संगठनों को बंद करने तक के लिए मजबूर किया जाता है।

पत्रकारों के साथ मारपीट की जाती है और उन्हें धमकियां तक दी जाती हैं। यही ऐसी चीजें हैं जो अभिव्यक्ति की आजादी में बाधाएं हैं। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए ये दिन मनाया जाता है। 

कैसे मनाया जाता है ये दिन?

यूनेस्को द्वारा 1997 से हर साल 3 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर गिलेरमो कानो वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम प्राइज दिया जाता है। यह पुरस्कार उस व्यक्ति अथवा संस्थान को दिया जाता है, जिसने प्रेस की स्वतंत्रता के लिए उल्लेखनीय कार्य किया हो।

साथ ही स्कूल, कॉलेज, सरकारी संस्थानों और अन्य शैक्षिक संस्थानों में प्रेस की आजादी पर वाद-विवाद, निबंध लेखन प्रतियोगिता और क्विज का आयोजन होता है। लोगों को अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार से अवगत कराया जाता है।


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