तंबाकू कैपिटल बनना दुर्भाग्य
भोजन का सेवन करो, तंबाकू नहीं
हर साल 31 मई को 'विश्व तंबाकू निषेध दिवस' के रूप में मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस वर्ष के लिए थीम रखी है, हमें भोजन की जरूरत है, तंबाकू की नहीं। इंसानों के अलावा पर्यावरण पर भी तंबाकू उद्योग का हानिकारक प्रभाव बढ़ रहा है, जिससे हमारे ग्रह पर दुर्लभ संसाधन और नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र पर पहले से ही मौजूद दबाव में अनावश्यक वृद्धि हो रही है।
93 फीसदी तंबाकू उत्पादन चार राज्यों में
इतने सख्त नियम, फिर भी कारोबार कम नहीं
किसान भी बीमारी की चपेट में
करीब एक चौथाई तंबाकू किसानों को ग्रीन टोबैको सिकनेस नाम की बीमारी भी हो जाती है। इसमें त्वचा से सोखे गए निकोटिन से शरीर में विष फैल जाता है। दिन भर तंबाकू के बीच काम करने वाले किसान एक दिन में 50 सिगरेट के बराबर निकोटीन ले लेते हैं।
भारत तंबाकू का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता एवं उत्पादक देश भी है
29 राज्य और दो केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़ व पुद्दुचेरी में हुए वैश्विक व्यस्क तंबाकू सर्वे ने पुरुषों के बीच इन उत्पादों के सेवन में कमी आने की प्रवृत्ति पता चली है, लेकिन महिलाओं में धूम्रपान के बढ़ने की प्रवृत्ति पाई गई।