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विश्व किडनी दिवस: 70 प्रतिशत किडनी लक्षण से पहले ही खराब, इलाज में न करें देरी

Thu, 11 Mar 2021 07:17 AM IST
Kuldeep Singh अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली
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विश्व किडनी दिवस
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कोरोना महामारी के साथ दूसरी बार विश्व किडनी दिवस दुनियाभर में आज मनाया जा रहा है। इस बार इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी (आईएसएन) ने वर्ल्ड किडनी डे की थीम ‘किडनी हेल्थ फॉर एव्रीवन एव्रीवेयर’- लिविंग वेल विद किडनी डिसीज रखी है। किडनी की सेहत को नुकसान होने में कई महीने और वर्षों लग सकते हैं।

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मुंबई स्थित कोकिला बेन अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग के हेड डॉ. शरद सेठ बताते हैं, किडनी रोग की खराब बात यह है कि गुर्दा करीब 70 प्रतिशत खराब होने के बाद भी लक्षण सामने नहीं आते। बीमारी का पता चलता है तब भी लोग लापरवाही करते हैं, क्योंकि उन्हें परेशानी महसूस नहीं होती है।

लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के किडनी ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. ईश्वर राम ध्याल कहते हैं, किडनी में लाखों सूक्ष्म फिल्टर होते हैं जिन्हें नेफ्रॉन्स कहते हैं। नेफ्रॉन्स को नुकसान होने से वह काम करना बंद कर देते हैं।
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हालांकि, स्वस्थ नेफ्रॉन्स अत्यधिक काम कर गुर्दे की प्रक्रिया को सुचारू रखते हैं। कुछ समय बाद बड़ी मात्रा में नेफ्रॉन्स काम करना बंद कर देते हैं जिससे किडनी अचानक रक्त साफ करना बंद कर देती है।

बच्चों में भी तेजी से बढ़ रहा गुर्दा रोग
पीजीआई, लखनऊ के पीडियाट्रिक यूरोलॉजिस्ट डॉ. एमएस अंसारी बताते हैं कि बच्चों में भी गुर्दा रोग तेजी से बढ़ रहा है। 100 में से 10 से 15 फीसदी बच्चों को किडनी की पैदाइशी बीमारी होती है।

इनके मूत्राशय की नली और किडनी के वॉल्व में तकलीफ दिखती है। इसी तरह स्वस्थ बच्चों की बात करें तो 1000 में से 100 से 150 बच्चों को किडनी संबंधी रोग होता है। अधिकतर मामलो में इलाज डायलिसिस या प्रत्यारोपण ही है।

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