स्वदेशी कोवाक्सिन टीका लगवाने के लिए अब सहमति पत्र भरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (सीडीएससीओ) के अधीन विशेषज्ञ समूह (एसईसी) ने बुधवार को हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक कंपनी के कोवाक्सिन को परीक्षण की स्थिति से बाहर आने का हवाला देते हुए कोविशील्ड की तरह ही आपातकालीन स्थिति में इस्तेमाल की अनुमति प्रदान की है।
दरअसल बीते तीन जनवरी को भारत सरकार ने कोविशील्ड और कोवाक्सिन को आपातकालीन स्थिति में इस्तेमाल की मंजूरी दी थी लेकिन कोवाक्सिन उस वक्त तीसरे चरण के परीक्षण में था। इसलिए सरकार ने सहमति पत्र भरने की शर्त के साथ ही इसे अनुमति दी थी।
16 जनवरी से जब देश में टीकाकरण शुरू हुआ तब से कोवाक्सिन देने से पहले सहमति पत्र भरवाना जरूरी था जिसमें वैक्सीन के दुष्प्रभाव इत्यादि के बारे में पूरी जानकारी दी गई थी।
दो दिन पहले ही कोवाक्सिन के संतोषजनक परीक्षण परिणाम सामने आने के बाद विशेषज्ञ समिति ने शर्तों को हटाने का फैसला लिया। अब कोविशील्ड की तरह ही कोवाक्सिन का इस्तेमाल किया जा सकेगा। तीसरे चरण के परीक्षण में कोवाक्सिन 81 फीसदी तक असरदार मिला है।
150 रुपये में 10 करोड़ टीकों के लिए हुआ था करार : चौबे
निजी अस्पतालों में कोरोना का टीका 250 रुपये में मिल रहा है। जानकारी मिली है कि पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने कोविशील्ड की 10 करोड़ डोज सरकार को 150 रुपये की प्रति डोज की कीमत में उपलब्ध कराने का करार किया है जिस पर 100 रुपये सर्विस चार्ज निजी अस्पताल ले सकता है।
इस हिसाब से एक डोज 250 रुपये की कीमत में उपलब्ध है लेकिन टीकाकरण के अगले चरणों में वैक्सीन की कीमत यही रहेगी या फिर इसमें बदलाव किया जाएगा? इसे लेकर केंद्र सरकार ने जानकारी नहीं दी है।
राज्यसभा में वैक्सीन कीमत को लेकर उठे सवाल पर केंद्रीय राज्य स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने बताया है कि सीरम ने कोविशील्ड की 10 करोड़ डोज को इन कीमत पर उपलब्ध कराने का करार किया है। ठीक इसी तरह का करार हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक कंपनी ने भी किया है।