यूनेस्को की ओर से 2012 में प्राकृतिक विश्व धरोहर घोषित किए गए भारत के प्रतिष्ठित पश्चिमी घाटों पर जनसंख्या दबाव, शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन का खतरा मंडरा रहा है। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।
आईयूसीएन की पिछले सप्ताह प्रकाशित रिपोर्ट ‘वर्ल्ड हेरिटेज ऑउटलुक 3’ में 252 प्राकृतिक विश्व धरोहरों के संरक्षण के लिए उठाए गए कदमों की समीक्षा की गई। इस रिपोर्ट में 2014 और 2017 की रिपोर्ट के आधार पर हुए काम और मौजूदा स्थिति का जिक्र है।
रिपोर्ट के मुताबिक जैव विविधता के लिए दुनिया के आठवें सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र पश्चिमी घाटोें की पर्वतमालाओं के संरक्षण को लेकर गहरी चिंता जताई गई। रिपोर्ट में इन पर्वतमालाओं पर जनसंख्या वृद्धि से उत्पन्न दबाव, शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन से भारी संकट की आशंका जताई गई।