दिल्ली के बीएल कपूर अस्पताल में कार्यरत प्रसिद्ध मनोचिकित्सक मनीष जैन ने कहा कि स्मार्ट फोन के प्रति बढ़ती दीवानगी एक बीमारी का रुप ले चुकी है। इसका कारण यह है कि एक मोबाइल में एक व्यक्ति की पसंद की ज्यादातर चीजें एक ही प्लेटफॉर्म पर मिल जा रही हैं। इसके कारण अब वह अलग-अलग समय देने की बजाय एक ही गैजेट पर ज्यादा समय दे रहा है। गीत-संगीत, सिनेमा, दोस्तों से बातचीत, संदेश देना, ऑफिस का काम हो या कोई रचनात्मक कार्य करना सब कुछ एक जगह पर मिलने के कारण मोबाइल के प्रति लोगों का समय बढ़ता जा रहा है।
लेकिन इसी के साथ अच्छी बात है कि लोग इसके खतरे के प्रति भी आगाह हो रहे हैं। मनोचिकित्सक मनीष जैन ने कहा कि वे ऐसे कई परिवारों को जानते हैं जिन्होंने अपने घर पर टीवी नहीं रखा है या वे अपने बच्चों को मोबाइल नहीं देखने दे रहे हैं। लोग अपने फेसबुक, ट्विटर या इंस्टाग्राम एकाउंट खत्म कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अपनी उच्चतम सीमा पर पहुंच जाने के बाद मोबाइल के प्रति भी लोगों की दीवानगी में कमी आएगी। इसकी शुरुआत हो चुकी है।
सैकड़ों पुस्तकों का विमोचन
विश्व पुस्तक मेले में चालीस विदेशी प्रकाशकों के साथ हजारों प्रकाशक मेले में उपस्थित हैं। पाठकों की भी अच्छी खासी भीड़ रोज मेले में पहुंच रही है। साहित्य अकादमी से मिली जानकारी के अनुसार मेले के तीन दिनों के भीतर उनकी लगभग दो सौ नई पुस्तकों का विमोचन हो चुका है।
प्रभात प्रकाशन हो या अन्य प्रकाशन, उनके साथ भी यही अनुभव है। इससे यह संकेत भी जाता है कि अगर पाठकों को उनकी सामग्री मिलेगी तो उसे पढ़ने वालों की कोई कमी नहीं होगी।