इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि बायोफ्यूल सिर्फ विज्ञान नहीं है बल्कि वह मंत्र है जो 21वीं सदी के भारत को नई ऊर्जा देने वाला है। बायोफ्यूल यानी फसलों से निकला ईंधन या कूड़े-कचरे से निकला ईंधन। प्रधानमंत्री ने कहा, 'ये गांव से लेकर शहर तक के जीवन को बदलने वाला है। आम के आम, गुठली के दाम की जो पुरानी कहावत है, उसका ये आधुनिक रूप है।'
इथेनॉल से बचे 4 हजार करोड़
उन्होंने कहा कि गन्ने से इथेनॉल बनाने की योजना पर अटल जी की सरकार के दौरान काम शुरू हुआ था लेकिन बीते एक दशक में इस पर गंभीरता से प्रयास नहीं हुए। जब 2014 में केंद्र में NDA की सरकार बनी तो रोडमैप तैयार किया गया और इथेनॉल को मिलाने का प्रोग्राम शुरू किया गया। उन्होंने कहा कि इथेनॉल ने न सिर्फ किसानों को लाभ पहुंचाया है, बल्कि देश का पैसा भी बचाया है। इथेनॉल को पेट्रोल के साथ मिक्स करने से पिछले वर्ष देश को लगभग 4 हजार करोड़ रुपये के बराबर की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। पीएम ने कहा कि लक्ष्य यह है कि अगले चार वर्ष में ये बचत करीब 12 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचे।
उन्होंने कहा कि बायोफ्यूल का इस्तेमाल किसानों की आमदनी बढ़ाएगा, रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा, देश का धन बचाएगा और पर्यावरण के लिए भी वरदान साबित होगा। पीएम ने कहा कि देश के लिए यह हमारे उस व्यापक विजन का हिस्सा है, जहां स्वच्छता, स्वास्थ्य और गांव-गरीब-किसान के समृद्धि का रास्ता और मजबूत होगा।
प्रधानमंत्री में बताया कि बायोमास को बायोफ्यूल में बदलने के लिए सरकार बड़े स्तर पर निवेश कर रही है। देशभर में 12 आधुनिक रिफाइनरी बनाने की योजना है। रिफाइनरी के संचालन से लेकर सप्लाई चेन तक, लगभग डेढ़ लाख नौजवानों को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंने कहा कि आज गोबरधन, वनधन और जनधन से गरीबों, किसानों, आदिवासियों के जीवन में व्यापक बदलाव के प्रयास हो रहे हैं। ना सिर्फ फसल बल्कि पशु के गोबर का, खेत के अवशेष का, कूड़े-कचरे के उचित उपयोग के लिए काम हो रहा है।