विश्व बैंक की हालिया रिपोर्ट मे भारत के सामाजिक-आर्थिक ढांचे पर इंटरनेट कनेक्टिविटी, मोबाइल टेलिकम्युनिकेशन और सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म सहित डिजिटल टेक्नोलॉजी के परिवर्तनकारी प्रभाव पर प्रकाश डाला गया है। इसमें कहा गया है कि एक वैश्विक प्रौद्योगिकी पावरहाउस के रूप में भारत की स्थिति मजबूत हुई है।
भारत की डिजिटल उन्नति उद्यमिता, आय सृजन और सामाजिक वृद्धि को बढ़ावा देने में सहायक साबित हुआ है। विशेष रूप से छोटे विक्रेताओं और आर्थिक रूप से पिछड़े जिलों को इससे लाभ पहुंच रहा है। विश्व बैंक की हालिया रिपोर्ट मे भारत के सामाजिक-आर्थिक ढांचे पर इंटरनेट कनेक्टिविटी, मोबाइल टेलिकम्युनिकेशन और सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म सहित डिजिटल टेक्नोलॉजी के परिवर्तनकारी प्रभाव पर प्रकाश डाला गया है। इसमें कहा गया है कि एक वैश्विक प्रौद्योगिकी पावरहाउस के रूप में भारत की स्थिति मजबूत हुई है।
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विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल पूंजी ने भारत में उद्यमशीलता और व्यावसायिक आय में वृद्धि की है। इससे छोटे कारोबारियों को समर्थन मिल रहा है। डिजिटल टेक्नोलॉजी वंचित पृष्ठभूमि के छात्रों को शिक्षण सामग्री तक पहुंच प्रदान करती हैं। इससे उनके प्रतिभा विकास और सामाजिक गतिशीलता को बढ़ावा मिलता है।
डिजिटल सॉल्यूशन लोगों को ऑनलाइन गतिविधियों और भुगतान के रिकॉर्ड को बनाए रखने में मदद की है। यह उनके लिए डिजिटल पूंजी के रूप में काम कर सकता है। यह पूंजी लोगों को लेन-देन रिकॉर्ड, कर भुगतान और लोन इतिहास सहित अन्य जानकारी वित्तीय संस्थानों को साख का मूल्यांकन करने में सहायता करती है।
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नंदन नीलेकणि को आधार के लिए श्रेय
2009 में आधार प्रणाली के लिए रिपोर्ट अग्रणी तकनीकी उद्यमियों में से एक नंदन नीलेकणि को श्रेय देती है। इस डिजिटल पहचान कार्यक्रम ने लाखों भारतीयों को डिजिटल साख बनाने और औपचारिक अर्थव्यवस्था में भाग लेने में सक्षम बनाया है। रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक सुधारों के बाद, शहर में रहने वाले वंचित समुदायों ने अपने ग्रामीण समकक्षों की तुलना में अधिक उन्नति हासिल की है।