सीबीआई की ओर से मंगलवार को बताया गया कि इन लोगों को आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक साजिश, टिकटों की जालसाजी, धोखाधड़ी, जालसाजी और जाली दस्तावेज बनाने व रखने के लिए दोषी पाया गया। सीबीआई ने सीआईडी क्राइम की जांच के आधार पर मामला दर्ज किया था।
तेलगी बोगस स्टांप घोटाले में सीबीआई अदालत ने पांच दोषियों फल्गुनी बेन बाबूभाई पटेल, किशोर कुमार पुरुषोत्तमभाई पटेल, प्रशांत नांगप्पा पाटिल, अमजद अली और शैल जाकिर हुसैन को तीन साल के कारावास और कुल 2.5 लाख रुपये के जुर्माना की सजा सुनाई।
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सीबीआई की ओर से मंगलवार को बताया गया कि इन लोगों को आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक साजिश, टिकटों की जालसाजी, धोखाधड़ी, जालसाजी और जाली दस्तावेज बनाने व रखने के लिए दोषी पाया गया। सीबीआई ने सीआईडी क्राइम की जांच के आधार पर मामला दर्ज किया था। इसमें आरोप लगाया गया था कि दोषियों ने गुजरात के अहमदाबाद और सूरत क्षेत्र में विभिन्न मूल्यवर्ग के जाली स्टांप पेपर, कोर्ट फीस स्टांप, शेयर ट्रांसफर स्टांप की बिक्री की। जांच के दौरान सूरत और अहमदाबाद में स्टांप विक्रेताओं पर छापों के दौरान बड़ी संख्या में बोगस स्टांप बरामद किए गए थे। इन अवैध गतिविधियों के संचालन के लिए सदगुरु सर्विसेज और सहाय सर्विसेज नाम से चल रहे दो कार्यालयों का पता चला था।
2001 में सामने आया था घोटाला
घोटाला 2001 में सामने आया। इसके तहत बोगस स्टांप पेपर की व्यापक बिक्री के कारण न केवल अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा, बल्कि सार्वजनिक प्रशासन की साख भी प्रभावित हुई थी। मामले में सीबीआई ने कुल 16 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इनमें से दो आरोपियों की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो गई थी, जबकि 9 अन्य को पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है।