फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Corruption: विश्व भ्रष्टाचार निषेध दिवस आज, भ्रष्टाचार में महाराष्ट्र-राजस्थान व कर्नाटक टॉप पर, हर रोज 11 केस

Sat, 09 Dec 2023 06:29 AM IST
जलज मिश्रा अमर उजाला रिसर्च टीम

सार

भ्रष्ट राज्यों की सूची में महाराष्ट्र, राजस्थान और कर्नाटक पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। 2020 और 2021 में भी यही राज्य टॉप-3 में शामिल थे। सबसे ज्यादा रिश्वतखोरी भू, राजस्व, रजिस्ट्रेशन संबंधित मामलों में है। दूसरे पर पुलिस और तीसरे पर नगर निगम का नंबर आता है।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारत में हर दिन भ्रष्टाचार के औसतन 11 मामले दर्ज किए जाते हैं। 2021 के मुकाबले 2022 में भ्रष्टाचार के मामलों में करीब 11 फीसदी का इजाफा हुआ है। एनसीआरबी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में जहां कुल 3,745 मामले सामने आए थे, तो वहीं 2022 में बढ़कर 4139 हो गए।

भ्रष्ट राज्यों की सूची में महाराष्ट्र, राजस्थान और कर्नाटक पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। 2020 और 2021 में भी यही राज्य टॉप-3 में शामिल थे। सबसे ज्यादा रिश्वतखोरी भू, राजस्व, रजिस्ट्रेशन संबंधित मामलों में है। दूसरे पर पुलिस और तीसरे पर नगर निगम का नंबर आता है। यहां पर लोगों को सर्वाधिक रिश्वत देनी पड़ती है। घूसखोरी के तरीकों की बात करें तो 71 फीसदी मामलों में रिश्वत गिफ्ट अथवा कैश के रूप में दिए जाते हैं। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के 'भ्रष्टाचार सूचकांक 2022'  में भारत 40 अंकों के साथ दुनिया में 85वें स्थान पर है।

महाराष्ट्र में दोषी करार दिए जाने की दर महज 8.2 फीसदी

विज्ञापन

रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र में भ्रष्टाचारियों पर दोष साबित होने की दर बहुत कम है। यहां करीब 92 फीसदी मामलों में आरोपियों पर दोष सिद्ध नहीं हो पाता। इसी तरह कर्नाटक में भी 63 फीसदी आरोपी दोषी करार नहीं दिए जाते। राजस्थान में स्थिति थोड़ी बेहतर है, यहां 51.2 प्रतिशत मामलों में आरोपी दोषी करार दिए जाते हैं। देश की बात करें तो भारत में भ्रष्टाचार के 60 फीसदी मामलों में दोष सिद्ध नहीं हो पाता।  

किस महकमे में रिश्वतखोरी की कितनी हिस्सेदारी

  1. भूमि विवाद में 26 फीसदी
  2. पुलिस महकमे में 19 फीसदी  
  3. म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन में 13 फीसदी
  4. ट्रांसपोर्ट विभाग में 13 फीसदी
  5. टैक्स विभाग में 8 फीसदी
  6. जल विभाग में 5 फीसदी
  7. बिजली बोर्ड में 3 फीसदी
  8. अन्य 13 फीसदी

(स्रोत : एनसीआरबी और लोकल सर्कल इंडिया करप्शन सर्वे रिपोर्ट)

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें