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World AIDS Vaccine Day: असमानता खत्म कर एड्स से पाएं छुटकारा, 40 से ज्यादा टीकाें पर दुनिया में चल रहे ट्रायल

Thu, 18 May 2023 05:59 AM IST
देव कश्यप परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली।

सार

दुनिया के लिए एड्स पुरानी बीमारी है, फिर भी अब तक इसका टीका नहीं बनाया जा सका। लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 18 मई को विश्व एड्स टीका दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम है ‘असमानता समाप्त करना, एड्स खत्म करना’। पढ़िए परीक्षित निर्भय की यह रिपोर्ट...
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World AIDS Vaccine Day 2023 - फोटो : Twitter@drharshvardhan
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विस्तार
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भारत में 1986 में पहले एक्वायर्ड इम्यून डेफिसिएंसी सिंड्रोम (एड्स) पीड़ित की पहचान करने वाले एड्स सोसाइटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. ईश्वर गिलाडा का कहना है कि ह्युमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस (एचआईवी) संचरण को रोकने और इससे पीड़ित की देखभाल के तरीकों को अपनाने के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक सबूत हैं, इसके बावजूद इस ज्ञान को जमीन पर वास्तविक रूप मेंे नहीं लाया जा रहा।

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डॉ. गिलाडा के अनुसार, दुनियाभर में 40 से भी ज्यादा टीकों के ट्रायल चल रहे हैं। दिसंबर, 2022 में बेल्जियम की कंपनी जैनसेन फार्मास्युटिकल्स ने टीका अनुसंधान को अचानक रोक दिया था। भारत पर भी असका प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। सर जेजे ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल के प्रोफेसर डॉ. वकार शेख का कहना है कि टीके का इंतजार अब तीन से पांच साल लंबा भी हो सकता है। भारतीय वैज्ञानिक भी खोज में जुटे हैं, पर कोई सकारात्मक संकेत नहीं दिखे हैं।

दुनिया में एचआईवी मरीज
साल 2021 में जारी यूएन एड्स की रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में 3.90 करोड़ लोग एचआईवी/एड्स से ग्रसित हैं। इनमें 15 साल से कम उम्र के बच्चों की संख्या 18 लाख है। इसमें से 2.50 करोड़ रोगी एंटी रेट्रोवायरल थेरैपी प्राप्त कर रहे हैं। 15 लाख रोगियों की मौत सालाना दर्ज की जा रही है।

  • भारत में एचआईवी/एड्स संक्रमण का रुझान लगातार कम हो रहा है। कुल रोगी करीब 24 लाख हैं। साल 2017 में 87 हजार मामले सामने आए, जबकि 2021 में करीब 70 हजार नए रोगी मिले।
  • रिपोर्ट यह भी बताती है कि दुनिया में एड्स का पहला मामला सामने आने से लेकर अब तक सात करोड़ से ज्यादा लोगों में वायरस की पुष्टि हुई है, जबकि 3.50 करोड़ पीड़ितों की अब तक मौत हुई है। देश में 1995 की तुलना में अब एचआईवी/एड्स रोगियों में करीब 90 फीसदी की कमी दर्ज की गई है।

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सफेद कोशिकाएं बनती हैं निशाना
नई दिल्ली स्थित राम मनोहर लोहिया अस्पताल की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सुचेता बताती हैं कि एचआईवी वायरस मरीज के शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली में सीडी-4 यानी एक प्रकार की सफेद रक्त कोशिकाओं पर हमला करता है।

  • शरीर में प्रवेश के बाद एचआईवी वायरस तेजी से बढ़ने लगता है। इसी एचआईवी की वजह से एक्वायर्ड इम्यून डेफिसिएंसी सिंड्रोम (एड्स) होता है।
  • हालांकि, यह जरूरी नहीं कि सभी एचआईवी रोगियों को एड्स हो। एचआईवी से संक्रमित व्यक्ति में एड्स के लक्षण विकसित होने की आशंका तब होती है, जब एचआईवी संक्रमण से लड़ने के लिए उसकी प्रतिरक्षा प्रणाली बहुत कमजोर हो जाती है।


पहली बार ‘एड्स’ शब्द का इस्तेमाल
सितंबर, 1982 में सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने पहली बार ‘एड्स’ शब्द का इस्तेमाल किया। 1983 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने वैश्विक स्तर पर स्थिति का आकलन करने के लिए पहली बैठक की। हालांकि, इस पर वैश्विक कार्यक्रम जारी करने में डब्ल्यूएचओ को 1987 तक का वक्त लगा और इसके बाद एक दिसंबर 1988 को पहली बार विश्व एड्स दिवस मनाने की घोषणा हुई।

ऐसे होता है प्रसार
एचआईवी संक्रमण रक्त, यौन संबंध सहित शारीरिक तरल पदार्थों के माध्यम से एक से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। एचआईवी के संचरण के लिए शारीरिक तरल पदार्थ में वायरस की पर्याप्त संख्या होनी चाहिए। कई बार रोगियों में एचआईवी संक्रमण की पहचान नहीं हो पाती है।

  • वायरस की संख्या कम होती है, तो जांच में इसकी पहचान नहीं हो पाती।

ये हैं लक्षण
करीब 80 फीसदी रोगियों में वायरस प्रवेश के दो से छह सप्ताह बाद एक्यूट रेट्रोवायरल सिंड्रोम नामक लक्षणों का एक समूह विकसित होता है। प्रारंभिक लक्षणों में बुखार, ठंड लगना, जोड़ों में दर्द, गले में खराश, रात में पसीना, ग्रंथियों का बढ़ जाना, लाल चकत्ते, थकान, वजन अचानक कम होना और मुंह में छाले शामिल हैं। कई बार लक्षण सामने भी नहीं आते।

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