भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र (डब्ल्यूएमसीसी) की 27वीं बैठक बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित की गई। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों पक्षों ने भारत-चीन सीमा क्षेत्रों के पश्चिमी क्षेत्र में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के पास की स्थिति की समीक्षा की। दोनों देशों ने बचे हुए तनाव के इलाकों से पीछे हटने के प्रस्तावों पर भी चर्चा की।
दोनों देश इस बात पर सहमत हुए कि अमन-चैन की बहाली से द्विपक्षीय संबंधों के सामान्य होने की स्थिति बनेगी। इस उद्देश्य के लिए दोनों पक्ष जल्द से जल्द सैन्य वार्ता के अगले दौर को आयोजित करने पर सहमत हुए। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सीमा पर शांति और यथा यथास्थिति बहाली के उद्देश्य के तहत मौजूदा द्विपक्षीय समझौतों और प्रोटोकॉल के अनुसार वे जल्द से जल्द वरिष्ठ कमांडरों की बैठक के अगले (19वें) दौर को आयोजित करने पर सहमत हुए। दोनों पक्ष सैन्य और राजनयिक चैनलों के माध्यम से चर्चा जारी रखने पर भी सहमत हुए।
22 फरवरी को हुई थी पिछली बैठक
इससे पहले 22 फरवरी को डब्ल्यूएमसीसी की 26वीं बैठक बीजिंग में आयोजित की गई थी। जुलाई 2019 के बाद दोनों देशों के बीच इसकी यह पहली व्यक्तिगत बैठक थी। बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव (पूर्वी एशिया) ने किया था, जबकि चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व चीनी विदेश मंत्रालय के सीमा और समुद्री मामलों के विभाग के महानिदेशक ने किया था।
2012 में की गई थी डब्ल्यूएमसीसी की स्थापना
डब्ल्यूएमसीसी की स्थापना 2012 में की गई थी। इसका उद्देश्य सीमा मामलों पर भारत और चीन के बीच परामर्श और समन्वय के लिए एक मंच प्रदान करना है। 26वीं बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि यह ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के बीच गलवान घाटी में हिंसक झड़प के बाद से तनाव जारी है।