जगदीप धनखड़ ने कहा कि 75 साल की इस यात्रा में देश ने अपनी बुद्धिमत्ता और विरासत को त्यागे बिना आधुनिकता को अपनाना है। उन्होंने आगे कहा कि यह राज्यसभा सांसदों का दायित्व है कि वे इस आह्वान पर दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़े।
राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को वैश्विक मंच पर भारत की प्रतिष्ठा को ऊंचा उठाने वाली नीतियों पर एकजुट होकर काम करने को कहा। इसके साथ ही उन्होंने संसद की गरिमा बनाए रखने का भी अनुरोध किया। बजट सत्र के तीसरे दिन विपक्षी दलों के नेताओं ने वॉकआउट किया। सभापति धनखड़ ने महाकुंभ मामले पर चर्चा समेत कई अन्य मुद्दों को उठाने के लिए उनके नोटिस को मंजूरी नहीं दी। सांसद प्रेम चंद गुप्ता और नरेश बंसल को जन्मदिन की बधाई देने के बाद धनखड़ ने कहा कि एक जीवंत और कार्यात्मक संसद लोकतंत्र की जीवनरेखा है।
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जगदीप धनखड़ ने कहा कि 75 साल की इस यात्रा में देश ने अपनी बुद्धिमत्ता और विरासत को त्यागे बिना आधुनिकता को अपनाना है। उन्होंने आगे कहा कि यह राज्यसभा सांसदों का दायित्व है कि वे इस आह्वान पर दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़े। धनखड़ ने कहा, "हमारे साझा सपने और महत्वाकांक्षाओं ने अंतरिक्ष अन्वेषण और इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में डिजिटल नवोन्मेष और सतत विकास के लक्ष्यों को हासिल करने में मदद की है। विरासत के साथ विकास के मंत्र के साथ हम 2047 तक विकसित भारत की तरफ आगे बढ़ रहे हैं।"
धनखड़ ने सांसदों से कहा, "हमारा काम महान है, इसलिए हमारा संकल्प भी बड़ा होना चाहिए। आइए इस संसद की गरिमा को बनाए रखने के लिए संकल्प लें। हमें वैश्विक मंच पर भारत की प्रतिष्ठा को ऊंचा उठाने वाली नीतियों पर एकजुट होकर काम करना चाहिए।"
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जैसे ही सदन का सत्र शुरू हुआ, सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा, "आइए हम मिलकर सहयोग करें और दूरदर्शिता के साथ कानून बनाएं। आइए हम सब मिलकर ऐसे भविष्य की दिशा में एक रास्ता तय करें जो संविधान में किए गए वादे को पूरा करता हो।" उन्होंने महाकुंभ को भारतीय संस्कृति का एक शानदार उत्सव बताया। इससे पहले सदन ने पूर्व राज्यसभा सांसद पलावलासा राजशेखरम के निधन का शोक व्यक्त किया।