मणिपुर कांग्रेस के नेता ओकरम इबोबी सिंह ने सोमवार को आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने विधायकों को धमकी दी थी कि अगर उनकी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया तो जनता उन्हें घर में रहने लायक नहीं छोड़ेगी। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि वह कांग्रेस नेता के आरोपों पर बाद में कोई बयान जारी कर सकते हैं।
इबोबी सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री का यह असंवेदनशील बयान था और यह संविधान में विधायकों को दिए गए विशेष अधिकारों और उनके सम्मान के खिलाफ था। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में जातीय संघर्ष शुरू हुए करीब दो साल हो चुके हैं। लेकिन भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार अपनी जिम्मेदारियां नहीं निभा रही हैं।
कांग्रेस नेता ने कहा, 'मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने कहा था कि अगर कोई विधायक आगामी विधानसभा सत्र में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाता है, तो जनता उसका पीछा करेगी, जिससे वह अपने घर में भी नहीं रह पाएगा।' उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ने यह टिप्पणी 14 जनवरी को राज्य भाजपा मुख्यालय में संविधान गौरव अभियान के दौरान की थी।
राज्य के चार बार मुख्यमंत्री रह चुके इबोबी सिंह सिंह ने कहा, 'ऐसी बयानबाजी अनैतिक है और सदन के नेता के पद के अनुकूल नहीं है। यह संविधान में विधायकों को दिए गए अधिकारों और विशेषाधिकारों के खिलाफ है और विपक्ष का मखौल उड़ाने जैसा है।'
उन्होंने कहा कि आमतौर पर अविश्वास प्रस्ताव विपक्ष की ओर से लाया जाता है और मुख्यमंत्री का बयान विधायकों को धमकाने जैसा है। हम इन धमकियों से डरने वाले नहीं हैं। हम जनता के हित में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते रहेंगे। करीब दो साल गए, लेकिन राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारियों को पूरा नहीं कर रही है। मणिपुर में मई 2023 से मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय संघर्ष में ढाई सौ से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
इबोबी सिंह ने कहा, 'इस मुद्दे को लेकर हमने राज्यपाल से मुलाकात की और उनसे सरकार, खासतौर पर मुख्यमंत्री को संविधान के तहत सलाह देने का आग्रह किया है। यदि कोई अप्रिय घटना होती है तो सरकार को जिम्मेदारी उठानी होगी। हमने राज्यपाल को इस मामले में पहले भी जानकारी दी और एक ज्ञापन भी सौंपा।' जब उनसे पूछा गया कि क्या अगले विधानसभा सत्र में अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा, तो उन्होंने कहा, 'हम पार्टी के सदस्यों से बातचीत के बाद इस मुद्दे पर फैसला लेंगे।' अगला विधानसभा सत्र दस फरवरी से शुरू होगा।