RSS: संत रविदास की 650वीं जयंती के अवसर पर आरएसएस नेता दत्तात्रेय होसबाले ने समाज को बदलने में उनकी भूमिका को याद किया। होसबाले ने कहा कि कुछ विभाजनकारी ताकतें जाति के आधार पर समाज को बांटने का प्यास कर रही हैं, ऐसे में समाज और राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए काम करने का संकल्प लेना चाहिए। पढ़िए रिपोर्ट-
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने शनिवार को कहा कि कई विभाजनकारी ताकतें वर्ग और जाति के आधार पर समाज को तोड़ने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने समाज और देश में एकता बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने संत रविदास को उनकी 650वीं जयंती पर श्रद्धांजलि दी और कहा कि भारत की महान संत परंपरा में उनका एक विशेष स्थान है।
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समाज की सोच बदलने में संत रविदास की ऐतिहासिक भूमिका
आरएसएस के दूसरे सबसे वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि संत रविदास ने जन्म के आधार पर होने वाले भेदभाव को नकारा और यह माना कि किसी व्यक्ति की महानता का असली प्रमाण उसके कर्म होते हैं। उन्होंने कहा कि संत रविदास ने समाज की सोच को बदलने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उन्होंने समाज को अंधविश्वास और पुरानी रूढ़ियों से मुक्त होने, बेकार परंपराओं को छोड़ने और बदलते समय के अनुसार सामाजिक बदलाव को अपनाने की प्रेरणा दी।
'राष्ट्रीय एकता-अखंडता के लिए काम करने का लें संकल्प'
होसबाले ने कहा, आज के समय में जब कई विभाजनकारी ताकतें वर्ग और जाति के आधार पर समाज को तोड़ने की कोशिश कर रही हैं, तब हम सभी को संत रविदास के जीवन संदेश के सार को समझते हुए, समाज और राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए काम करने का संकल्प लेना चाहिए।
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'नाकाम हुई संत रविदास का धर्म परिवर्तन कराने की कोशिशें'
उन्होंने भारत के आध्यात्मिक और सामाजिक जीवन को आकार देने में संत परंपरा के महत्व पर बात की। होसबाले ने कहा कि इस परंपरा ने न केवल भक्ति और सामाजिक सद्भाव को मजबूत किया, बल्कि विदेशी शासकों के अत्याचार के खिलाफ संघर्ष के लिए समाज को जागरूक और तैयार भी किया। आरएसएस ने दावा किया कि संत रविदास को इस्लाम में धर्म परिवर्तन कराने की कई कोशिशें कीं, लेकिन वे सफल नहीं हो सके और बाद में उनमें से कई लोग उनके शिष्य बन गए।
'नैतिक आचरण का प्रतीक था संत रविदास का जीवन'
उन्होंने हरियाणा के समालखा स्थित माधव सृष्टि में यह बात कही, जहां 13 से 15 मार्च तक अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक हो रही है। आरएसएस नेता ने यह भी कहा कि संत रविदास का जीवन श्रम की गरिमा और नैतिक आचरण का प्रतीक था। होसबाले ने कहा, उन्होंने अपने जीवन के माध्यम से समाज में श्रम की गरिमा और शुद्ध, सद्गुणी तथा पारदर्शी आचरण को फिर से स्थापित किया।