महाराष्ट्र में शक्ति पीठ एक्सप्रेसवे को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इसी बीच महाराष्ट्र सरकार में मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने आशंका जताई कि राज्य को अस्थिर करने की साजिश हो रही है। उन्होंने परियोजना को जरूरी बताते हुए कहा कि जैसे कोयना डैम और समृद्धि महामार्ग ने विकास में योगदान दिया, वैसे ही यह एक्सप्रेसवे भी अहम है। उन्होंने कहा कि किसानों को उचित मुआवजा मिलेगा।
महाराष्ट्र में शक्ति पीठ एक्सप्रेसवे को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे में शुक्रवार को महाराष्ट्र के उच्च व तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने शुक्रवार को कहा कि राज्य में बार-बार सरकार को अस्थिर करने और अराजकता फैलाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कोई ताकतें जानबूझकर राज्य में अस्थिरता फैलाने में लगी हैं। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सांगली में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जब भी राज्य में कोई घटना होती है, तो कुछ लोग माहौल बिगाड़ने की कोशिश करते हैं। ऐसा लगता है कि कोई छिपी ताकतें अराजकता फैलाना चाहती हैं।
हालांकि दूसरी ओर उन्होंने ये भी माना कि कोयना प्रोजेक्ट से प्रभावित कुछ लोगों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि शक्तिपीठ महामार्ग से प्रभावित किसानों को पूरा मुआवजा और पुनर्वास मिलना चाहिए। किसान विरोध बंद करें और सही मुआवजा पाने पर ध्यान दें।
कोल्हापुर में किसानों का विरोध प्रदर्शन
बता दें कि शक्ति पीठ एक्सप्रेसवे को लेकर कोल्हापुर में किसानों का बड़ा विरोध देखने को मिला। किसानों ने 'हमारे खेतों में तिरंगा, शक्ति पीठ नहीं चाहिए' के नारे के साथ प्रतीकात्मक आंदोलन किया। कांग्रेस नेता सतेज पाटिल ने भुदरगड़ और कागल तालुका में मोर्चा निकाला, वहीं स्वाभिमानी शेतकरी संघटना के प्रमुख राजू शेट्टी ने हाटकनंगले और शिरोल तालुका में आंदोलन का नेतृत्व किया। किसानों का कहना है कि यह परियोजना कोल्हापुर की सबसे उपजाऊ जमीन निगल जाएगी, जहां छोटे किसान खेती करते हैं। उन्होंने सरकार से परियोजना को रद्द करने की मांग की।